इंदौर के पहले डबल डेकर ब्रिज की सौगात से शहरवासी वंचित रहे। बुधवार को ब्रिज के लोकार्पण की घोषणा हुई, लेकिन ब्रिज ट्रैफिक के लिए नहीं खोला जा सका। इसकी वजह मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से अनुमति नहीं मिलने को बताया जा रहा है।
दरअसल, ब्रिज के नीचे मेट्रो ट्रेन का ट्रैक भी है। इस कारण ब्रिज को ट्रैफिक के लिए खोले जाने से पहले मेट्रो की सुरक्षा अनुमति जरूरी है। यह बात भी सामने आ रही है कि जिन दो विधानसभा क्षेत्रों से ब्रिज जुड़ा है, उनके विधायक बुधवार को इंदौर में नहीं थे। इस कारण ब्रिज का लोकार्पण टाल दिया गया। इससे वाहन चालकों में नाराजगी भी है। ब्रिज शुरू नहीं होने के कारण रोज शाम को ट्रैफिक जाम होता है।
बुधवार को अरविंदो से बाणगंगा की तरफ जाने वाले पुल से वाहनों की आवाजाही की घोषणा इंदौर विकास प्राधिकरण ने की थी। यह इंदौर का पहला डबल डेकर ब्रिज है, जिसके नीचे से सुपर कॉरिडोर की तरफ जाने वाला मार्ग है और बीच में मेट्रो का ट्रैक भी है। 70 फीट ऊंचे इस ब्रिज से जब ट्रैफिक गुजरेगा, तो यह वाहन चालकों के लिए अनोखा अनुभव होगा, क्योंकि प्रदेश में इतना ऊंचा दूसरा ब्रिज नहीं है। इस पुल के नीचे से मेट्रो भी गुजरेगी।
आगामी सिंहस्थ में इस पुल से यात्रियों को काफी लाभ होगा। 1454 मीटर लंबा यह पुल 6 लेन का है। 175 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल का निर्माण किया गया है। यह प्रदेश का पहला डबल डेकर पुल है। इंदौर विकास प्राधिकरण ने इस पुल का निर्माण कराया है। इसे बनने में तीन साल का समय लगा। इस ब्रिज से हर दिन एक लाख से ज्यादा वाहन गुजरेंगे। इंदौर-उज्जैन रोड पर बन रहे इस ब्रिज के बाद उज्जैन रोड को आठ लेन किया जाएगा।