इंदौर के विश्व प्रसिद्ध सराफा बाजार की रात्रिकालीन चौपाटी को लेकर प्रशासन और व्यापारी संगठनों के बीच सहमति बन गई है। अब यहां सिर्फ 69 दुकानें ही लगाई जा सकेंगी। यह निर्णय गुरुवार को सराफा एसोसिएशन, चौपाटी एसोसिएशन और नगर निगम के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में लिया गया। बैठक के बाद गुरुवार को रात में नगर निगम की टीम चौपाटी पर पहुंची और अवैध तरीके से लग रही दुकानों को हटवा दिया गया। इस दौरान कई दुकानदारों का गुस्सा भी फूटा और लगभग डेढ़ घंटे तक वे धरने पर बैठे रहे। बाद में निगम की टीम और अधिकारियों ने उन्हें समझाइश देकर रवाना किया। करीब सौ से अधिक दुकानों को अब वहां पर व्यापार करने से रोक दिया गया है।
प्रशासन की सख्त निगरानी
गुरुवार शाम से ही नगर निगम का बड़ा अमला सराफा बाजार में तैनात कर दिया गया था। अधिकारियों ने आते ही स्पष्ट कर दिया कि स्वीकृत सूची के अलावा अगर कोई भी दुकानदार अपनी दुकान लगाता है, तो उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। गौरतलब है कि पहले 80 दुकानों को अनुमति देने की चर्चा थी, लेकिन सहमति न बनने पर नई सूची तैयार की गई। इस अंतिम सूची पर सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता और सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुमचंद सोनी ने हस्ताक्षर किए हैं।
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केवल पारंपरिक स्वाद मिलेगा
प्रशासन ने सराफा की मूल पहचान को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले ही निर्देश दिए थे कि चौपाटी का पारंपरिक स्वरूप बना रहना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सराफा चौपाटी में मोमोज, नूडल्स और अन्य चाइनीज आइटम बेचने वालों को अनुमति नहीं दी गई है। अब यहां आने वाले पर्यटकों को केवल इंदौर के पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयां ही मिलेंगी, जिसके लिए यह बाजार जाना जाता है।