पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और कलेक्टर आशीष सिंह
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इंदौर में अवैध कॉलोनियों में की गई प्लॉटों की रजिस्ट्री को प्रशासन शून्य करवाने वाला है। कोर्ट के माध्यम से यह प्रक्रिया की जाएगी। आज कलेक्टर आशीष सिंह ने इसके लिए निर्देश दिए। लगभग एक साल पहले सरकार ने यह कहा था कि इंदौर में अब अवैध कॉलोनियां वैध नहीं हो सकेंगी। अवैध कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजर पर रासुका की कार्रवाही होगी और अगर किसी नई जगह पर अवैध कॉलोनी बनती है तो वहां के अधिकारी भी इसके जवाबदार होंगे। सरकार यह फैसला पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने जा रही है। सरकार का उद्देश्य है अवैध कॉलोनियों को रोकना ताकि जनता को लूटा न जा सके। इसके लगभग आठ महीने बाद अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई की और 11 अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर करवाई गई। अब इन कॉलोनियों की रजिस्ट्री भी शून्य करवाई जाएगी।
शिवराज ने कहा था वैध होंगी कॉलोनियों
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार अवैध कॉलोनियों को लेकर जो नया कानून ला रही है वह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के फैसले को पलट देगा। शिवराज सरकार ने 31 दिसंबर 2022 तक बनी सभी अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा की थी, लेकिन यह आदेश अमल में नहीं आ पाया।
राशि भी वापस करेंगे कॉलोनाइजर
कलेक्टर आशीष सिंह ने सोमवार को समय-सीमा (टीएल) की बैठक में इससे जुड़े निर्णय लिए। इसके तहत अब कॉलोनाइजरों को प्लॉट धारकों को राशि भी वापस करना होगी। इसके लिए कॉलोनी सेल को प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध कॉलोनियां शहर के लिए घातक
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि इंदौर में अभियान चलाकर अवैध कॉलोनाइजरों के विरुद्ध अनेक तरह की कार्रवाई की जा रही है। बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज कराई है। अब इंदौर में अवैध कॉलोनियों में बेचे गए प्लॉटों की रजिस्ट्री को शून्य करने की कार्यवाही प्रारंभ की जा रही है। कॉलोनाइजरों को प्लॉट धारकों को राशि भी वापस करना होगी। अवैध कॉलोनियों से अनियोजित विकास होता है। अवैध कॉलोनियां शहर के लिए घातक है। कॉलोनी सेल को निर्देशित किया है कि वे जिन कॉलोनियों के संबंध में एफआईआर दर्ज कराई गई है, प्रकरण कोर्ट में चल रहे हैं, कॉलोनी अवैध घोषित की गई है, उन मामलों में रजिस्ट्री शून्य करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। इस संबंध में कोर्ट में आवेदन लगाकर प्रक्रिया प्रारंभ करें। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन, इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी अहिरवार, अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, राजेंद्र रघुवंशी, निशा डामोर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।