कच्ची उम्र में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां अब केवल लड़कियों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अब लड़कों में भी एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। 15 से 25 वर्ष की उम्र के बीच यह संक्रमण सबसे अधिक देखा जा रहा है। हर साल भारत में सर्वाइकल कैंसर के 1 लाख 23 हजार से अधिक मामले सामने आते हैं। हालांकि, सरकारी वैक्सीन की गैरमौजूदगी और निजी अस्पतालों में टीके के महंगे डोज के कारण अब भी जनमानस में इस बीमारी को लेकर जागरूकता बेहद सीमित है। जबकि 15 वर्ष की उम्र से पहले लगाया गया टीका इस संक्रमण से प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
इंदौर में हुआ ‘कॉनकर एचपीवी एंड कैंसर कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा देशभर में चलाई जा रही पब्लिक हेल्थ इनिशिएटिव के अंतर्गत इंदौर में ‘कॉनकर एचपीवी एंड कैंसर कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में एचपीवी वायरस और उससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने गहन चर्चा की। इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रजबाला तिवारी, डॉ. मनीला जैन कौशल, डॉ. सायली कुलकर्णी (अरबिंदो आयुर्विज्ञान संस्थान), डॉ. संजीव सिंह रावत और डॉ. हिमांशु केलकर ने हिस्सा लिया। सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि टीकाकरण के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है ताकि संक्रमण को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।
हर साल 77 हजार मौतें, फिर भी वैक्सीनेशन में लापरवाही
कार्यक्रम में बताया गया कि आईसीओ-आईएआरसी इंफॉर्मेशन सेंटर ऑन एचपीवी एंड कैंसर (2023) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के लगभग 1.23 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से 77,000 लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा गुदा कैंसर के 90 प्रतिशत और लिंग कैंसर के 63 प्रतिशत मामले एचपीवी संक्रमण से जुड़े होते हैं। इसके बावजूद भारत में वैक्सीनेशन और इससे जुड़ी जागरूकता अभी भी निचले स्तर पर है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब शहर के डॉक्टरों के साथ-साथ सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने इस दिशा में पहल की है। संस्था 15 साल से कम उम्र के बच्चों को दो डोज और 15 से ऊपर वालों को तीन डोज वैक्सीन सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है, साथ ही व्यापक स्तर पर जनजागरूकता फैलाने की भी जिम्मेदारी ले रही है।
डॉक्टरों ने उठाया जागरूकता का बीड़ा, किशोरों तक पहुंचेगी सही जानकारी
विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी संक्रमण केवल महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि अन्य कई कैंसर का भी कारण बन सकता है। यह वायरस पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रभावित करता है। इस संक्रमण का खतरा सबसे अधिक किशोरों यानी 15 से 25 साल के युवाओं में होता है। डॉक्टरों के पैनल ने कहा कि अब वे स्वयं इस विषय पर जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठाएंगे ताकि किशोरों और उनके माता-पिता को सही जानकारी मिल सके। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पराग देशमुख ने बताया कि देशभर में आयोजित किए जा रहे इन कॉन्क्लेव के माध्यम से वे एचपीवी और इसके गंभीर परिणामों पर जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे हैं।