हाईकोर्ट ने विक्रम अवॉर्ड (स्पेशल एडवेंचर स्पोर्ट्स अवॉर्ड) के मामले में स्टे आदेश जारी किया है। इसकी सूचना खेल विभाग और समारोह से जुड़े अधिकारियों को दे दी गई है। संबंधित अधिकारियों को हाईकोर्ट के स्टे के आदेश की कॉपी भेज दी गई है। इसके साथ ही इसकी कॉपी भी संबंधितों को मौके पर दे दी गई है। यह अवॉर्ड भावना डेहरिया को दिया जाना था। पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार के मामले में हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है। इसी अवॉर्ड के मामले में इस केस के अलावा जबलपुर हाई कोर्ट में दो और केस चल रहे हैं।
भावना डेहरिया को पुरस्कार के लिए चुना
सरकार ने 2023 के लिए एडवेंचर स्पोर्ट्स कैटेगरी श्रेणी में छिंदवाड़ा की पर्वतारोही भावना डेहरिया को पुरस्कार के लिए चुना है। राऊ निवासी मधुसूदन पाटीदार ने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी है। पाटीदार का कहना है कि वे डेहरिया से वरिष्ठ हैं और समय से पहले माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाले पर्वतारोही हैं। उन्होंने अपनी उपलब्धियों की जानकारी के साथ पर्वतारोही श्रेणी में विक्रम अवॉर्ड के लिए राज्य सरकार को लिखित और मौखिक तौर पर आवेदन किया था। राज्य सरकार ने उनके आवेदन पर सुनवाई तो दूर, प्रतिक्रिया तक नहीं दी। इसके बाद कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि पाटीदार के आवेदन पर चार सप्ताह में फैसला लें। हाईकोर्ट की समय सीमा पूरी होने के बाद भी पाटीदार के आवेदन पर खेल एवं युवक कल्याण विभाग ने फैसला नहीं लिया। इसके बाद पाटीदार ने एडवोकेट अंकुर तिवारी और शिवांश द्विवेदी के जरिये हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। एडवोकेट अंकुर तिवारी ने बताया कि इस पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने पाटीदार के पक्ष में स्टे जारी करते हुए कहा कि जब तक उनकी रिप्रेजेंटेशन तय नहीं होगी, तब तक विक्रम अवॉर्ड (स्पेशल एडवेंचर अवॉर्ड) किसी को नहीं दिया जाए।
समारोह के ठीक पहले आदेश जारी
कोर्ट में बताया गया कि यह अवॉर्ड 29 अगस्त को खेल दिवस के दिन दिए जाते हैं। कोर्ट को अवगत कराया गया कि इसके बावजूद मप्र सरकार ने 5 अगस्त को भोपाल में मध्य प्रदेश शिखर खेल अलंकरण एवं 38वें नेशनल गेम्स 2025 के पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित किया है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने समारोह के दो घंटे पहले यह स्टे जारी किया है।