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Indore News: गार्डन सिटी से गैस चैंबर बना इंदौर, हरियाली गई, विनाश आया

Sun, 13 Apr 2025 06:07 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: कभी बाग-बगीचों की पहचान रखने वाला इंदौर अब प्रदूषण, गर्मी और जल संकट के लिए जाना जा रहा है। विकास के नाम पर हरियाली उजाड़ी गई, जिससे अब शहर में सिर्फ धूल, धुआं और ट्रैफिक बचा है। विशेषज्ञ इसे सोचा-समझा विनाश मान रहे हैं।
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अब हुकुमचंद मिल के पांच हजार पेड़ भी काटने की तैयारी चल रही है। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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कभी बड़े बाग-बगीचों की पहचान रखने वाला गार्डन सिटी इंदौर अब प्रदूषण, गर्मी और जल संकट के लिए जाना जा रहा है। विकास के नाम पर हरियाली उजाड़ी गई, जिससे अब शहर में सिर्फ धूल और धुआं बचा है। विशेषज्ञ इसे सोचा-समझा विनाश मान रहे हैं। कुछ साल पहले तक अपनी सुंदरता और अच्छे मौसम के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर अब रहने के लिए लोगों की पहली पसंद से हटता जा रहा है। ट्रैफिक जाम, बढ़ते अपराध, महंगी शिक्षा जैसे कारणों से  इंदौर लोगों की नजर से और भी दूर हो रहा है। पहले से कई संस्थाएं और नागरिक चेता रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। 

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मोहल्लों के नाम तक बाग बगीचों के नाम, माली मोहल्ला बसाया था
इंदौर में बाजार से लेकर रहवासी इलाकों तक के नाम बाग-बगीचों पर हैं। आज यहां पर केवल ट्रैफिक जाम और धूल धुआं दिखता है। पर्यावरणविद् ओपी जोशी बताते हैं कि इमली बाजार, खजूरी बाजार, बड़वाली चौकी, पीपली बाजार के नाम वहां पर होने वाले पेड़ों की वजह से ही रखे गए। लालबाग, माणिकबाग, केसरबाग, बख्शी बाग को भी वहां की हरियाली और पेड़ों की वजह से ही ये नाम मिले। इन बागों से ही इन रहवासी इलाकों की पहचान थी। प्रकाश का बगीचा और मरीमाता का बगीचा के बीच रावला के जमींदार का किला है। इंदौर में इतने बगीचे थे कि उनकी देखरेख करने वालों के लिए माली मोहल्ला बसाया गया था। नौलखा की हरियाली के कारण ही 1850 में रेसीडेंसी एरिया को सेंट्रल इंडिया का हेड क्वार्टर बनाया गया। होलकरों की छत्रियां छत्रीबाग में और जमींदारों की छत्री चम्पा बाग में है। यह सब सूरतें अब बदल गई हैं। 

नेहरू पार्क आधा हो गया, गांधी हॉल वीरान
शहर के बीचों बीच विस्को पार्क बनाया गया था जिसमें सैकड़ों पेड़ थे। वर्तमान में उसे नेहरू पार्क के नाम से जाना जाता है जहां अब 10 प्रतिशत भी पेड़ नहीं बचे हैं। इसके साथ ही गांधी हॉल और चिमन बाग में भी अब गिनती के पेड़ बचे हैं। 
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समय के साथ खो दी हरियाली
शहर के जानकार कमलेश सेन बताते हैं कि इंदौर के बागों में लाल बाग, बक्षी बाग, कैदी बाग, गोपाल बाग, रामबाग, विश्राम बाग, छत्रीबाग, माणिक बाग, केशर बाग जैसे अनेक बाग थे। शहर के जिस भी कोने में जाओ बागों की सुंदरता आपको आकर्षित कर लेती थी। आज इनमें से चुनिंदा बाग ही बचे हैं और वहां पर भी पेड़ नहीं हैं। हमने समय के साथ शहर की हरियाली खो दी और इसी का दुष्परिणाम है कि आज शहर प्रदूषण और भीषण गर्मी को झेल रहा है। 

कई बागों पर कॉलोनी बन गई
धार रोड पर सिरपुर, गुलाब बाग, चंदननगर, छोटे लाल का बगीचा, कृष्णबाग, रत्ना बाग, सीताराम बाग, एयरपोर्ट रोड पर सीताराम पार्क, महावीर बाग, खासगी बाग, मोहता बाग, महेश बाग, सत्य साई बाग, गणेश बाग, गंगा बाग, नंदन बाग, राजा बाग, दशरथ बाग, रोशन बाग, जाम बगीचा थे। इनमें से भी अधिकांश में अब हरियाली नहीं बची है। कई बागों की जगह पर तो कॉलोनी बन गई है। 

उज्जैन और देवास रोड पर भी थे खूब बाग
उज्जैन रोड पर रामबाग, नारायण बाग, शंकर बाग, सबनीस बाग, बख्शी बाग, मरीमाता का बगीचा, राधा गोविंद बगीचा, महावीर का बगीचा अपनी चमक बिखेरते थे। वहीं, देवास रोड पर महेश बाग, हीरा बाग, गुलाब बाग, पंचवटी, मुमताज बाग, राधा कृष्ण बाग, स्वर्ण बाग, तपेश्वरी बाग, शाहीबाग, अनार बाग, बाबा की बाग, दौलत बाग, छोटा शिवबाग, मसूर बाग, लाला का बगीचा, रुस्तम का बगीचा, दुबे का बगीचा और सीता बाग को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे।
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