मध्य प्रदेश में त्योहार के दौरान महिलाओं को सुगम आवागमन प्रदान करने के लिए चलाई गई विशेष परिवहन सेवा को व्यापक समर्थन मिला है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अपने मायके जाने वाली बहनों के लिए दो दिनों तक संचालित की गई मुफ्त बस यात्रा योजना बेहद राहत भरी साबित हुई। एआईसीटीएसएल द्वारा उपलब्ध कराई गई इस सुविधा का लाभ 56 हजार से अधिक महिला यात्रियों ने उठाया। आंकड़े दर्शाते हैं कि लगभग 50 हजार महिलाओं ने विभिन्न शहरों के बीच चलने वाली चार्टर बसों में यात्रा की, जबकि 6 हजार से अधिक महिलाओं ने शहर की आंतरिक सिटी बसों और आई-बस सेवा में बिना कोई किराया दिए सफर पूरा किया।
48 घंटे की विशेष मुफ्त बस सेवा
एआईसीटीएसएल की आधिकारिक प्रवक्ता माला सिंह ठाकुर के अनुसार रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में महिलाओं के लिए 27 अगस्त की सुबह 6 बजे से लेकर 29 अगस्त की सुबह 6 बजे तक कुल 48 घंटे के लिए यह मुफ्त सफर की व्यवस्था लागू की गई थी। इस निर्धारित समयावधि के दौरान इंदौर शहर से मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों की ओर जाने वाली और विभिन्न बाहरी शहरों से इंदौर आने वाली किसी भी महिला यात्री से बस किराया नहीं वसूला गया।
विभिन्न शहरों के लिए बस सेवाओं का संचालन
त्योहार के दौरान इंदौर से कई महत्वपूर्ण शहरों के लिए चार्टर बसों का सुचारू संचालन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, खरगोन, धार, झाबुआ, शाजापुर, गुना, अशोकनगर और ब्यावरा जैसे रूट शामिल थे। इन सभी मार्गों पर चलने वाली बसों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इस मुफ्त यात्रा सुविधा का लाभ उठाया।
त्योहार पर यात्रियों की संख्या में वृद्धि
परिवहन आंकड़ों के अनुसार सामान्य दिनों में शहर की आंतरिक बसों में प्रतिदिन लगभग 5 से 6 हजार यात्री सफर करते हैं। हालांकि, रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहारों के अवसर पर यह आंकड़ा बढ़कर रोजाना 8 से 9 हजार यात्रियों तक पहुंच जाता है। कुल यात्रियों में महिला यात्रियों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत रहती है। इसके अतिरिक्त, प्रमुख शहरों के बीच चलने वाली चार्टर बसों के प्रतिदिन 150 से भी अधिक फेरे संचालित किए जाते हैं।
बस स्टॉप पर महिलाओं की भारी भीड़
रक्षाबंधन के दिन तड़के से ही शहर के प्रमुख बस टर्मिनलों और स्टॉप्स पर महिलाओं की आवाजाही में काफी तेजी दर्ज की गई। अपने भाइयों को राखी बांधने मायके जा रही महिलाओं के साथ उनके परिवार के सदस्य भी यात्रा कर रहे थे, जिससे बसों और स्टॉप पर गहमागहमी बनी रही। शहर के भीतर भी विभिन्न स्थानों तक आने-जाने के लिए महिलाओं ने सिटी बस और आई-बस में मिलने वाली मुफ्त यात्रा सेवा का जमकर उपयोग किया।