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Indore News: इंदौर में मनी ईद, शहर काजी बोले-नशा बेचकर नस्लें तबाह करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करें

Sat, 21 Mar 2026 11:48 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में शनिवार को मीठी ईद मनाई गई। शहर काजी डॉ. इशरत अली ने नमाज के बाद अपने संबोधन में समाज को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों और बच्चों को स्मार्टफोन के नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने की अपील की और भाईचाारे का संदेश दिया।  
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इंदौर में ईद पर अदा हुई विशेष नमाज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के सदर बाजार ईदगाह मैदान पर शनिवार को ईद-उल-फितर का पर्व मनाया गया। इस मौके पर मुस्लिम समाज के हजारों लोगों ने सामूहिक नमाज अदा की। शहर काजी डॉ. इशरत अली ने नमाज के बाद खुतबा पढ़ा और देश में अमन, चैन, शांति और आपसी भाईचारे के लिए दुआ मांगी। उन्होंने अपने संबोधन में समाज को एकता और प्रेम का संदेश दिया।

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उन्होंने कहा कि परिवारों को नशे से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे परिवार बिगड़ता है। नशा समाज की नस्लों को प्रभावित कर रहा है। जो लोग नशा बेचकर नस्लों को खत्म कर रहे हैं, उनका बहिष्कार होना चाहिए। पहले नशा बेचने वालों को गलत निगाह से देखा जाता था, लेकिन आजकल नशा आम हो चुका है।
 

अब नशे अलग-अलग तरीके से किए जा रहे हैं। शराबी नशे में जेवर बेच देते हैं और चोरी करते हैं। नशे के कारण परिवारों में विवाद होते हैं, तलाक के हालात बनते हैं और इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट फोन से बच्चों को दूर रखें, उससे नकारात्मक विचार आते हैं। नशा हमारे लिए सबसे बड़ा दुश्मन है।

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उन्होंने कहा कि भारत कौमी एकता वाला मुल्क है। इंदौर सफाई में हाल ही के वर्षों में नंबर वन है, लेकिन इंदौर में पचास साल से कौमी एकता कायम है। यहां एक हिंदू परिवार शहर काजी को सम्मान के साथ नमाज के लिए लाता है। उन्होंने कहा कि सियासत हमें सियासी चश्मा लगाने की कोशिश करती है, लेकिन उसे नहीं पहनना है। हमें भाईचारा कायम रखना है। शहर काजी ने कहा कि यहूदी सामानों का बहिष्कार करना चाहिए और जो सामान भारत देश में बनता है, उसका इस्तेमाल करें। इससे यहूदी देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। कहने को वह छोटा देश है, लेकिन उसने पूरी दुनिया में आतंक फैला रखा है।
 

बग्घी पर सवार होकर ईदगाह पहुंचे शहर काजी

ईद के मौके पर उस परंपरा को भी निभाया गया, जो दशकों से इंदौर की गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान बनी हुई है। परंपरा के अनुसार सलवाड़िया परिवार के लोग ढोल-धमाकों के साथ निकले। शहर काजी बग्घी पर सवार थे और जुलूस का रास्ते भर लोगों ने स्वागत किया। ईदगाह पर नमाज  के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी।

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