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Indore News: डाॅ.आंबेडकर के पौते ने कहा- निजीकरण के कारण अब आरक्षण कागजों तक सीमित

Wed, 21 Jan 2026 06:57 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान को कम बताने की कोशिशों पर पलटवार करते हुए राजरत्न अंबेडकर ने इंदौर में तथ्यों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपरीत परिस्थितियों में भी बाबा साहेब ने देश को सर्वश्रेष्ठ संविधान दिया।
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राजरत्न आंबेडकर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रपौत्र व भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष राजरत्न आंबेडकर इंदौर में थे। उन्होंने मीडिया से चर्चा की और संविधान से जुड़ी बातों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संविधान में कहा कि शिक्षा की जिम्मेदारी राज्यों की होगी, लेकिन अब शिक्षा निजी हाथों में है। निजीकरण के कारण आरक्षण अब कागजों तक सीमित है। देश का संविधान खतरे में है। यह बात हवा में नहीं है।

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राजरत्न ने कहा कि हमें देश में सच्चा प्रतिनिधि चाहिए। 127 सांसद अनुसूचित जाति, जनजाति के हैं। इतना ही नहीं अनुसूचित जनजाति की तो राष्ट्रपति भी हैं, लेकिन मैं नहीं मानता कि यह हमारे सच्चे प्रतिनिधि हैं। मणिपुर जल रहा था, तब राष्ट्रपति का मुंह तक नहीं खुला। जनप्रतिनिधि केवल दलित है और मुंह बंद कर बैठा रहे, हमें ऐसा प्रतिनिधित्व नहीं चाहिए। बाबा साहेब की फोटो लेकर जाना है और उनके विचारों के विरोध में काम करना है, यह कहां तक उचित है।
 

राहुल गांधी भी संविधान की किताब हाथ में लेकर चल रहे हैं। हम यह जानना चाहते हैं कि क्या वे बाबा साहेब के संविधान का इस्तेमाल सिर्फ एससी के वोट पाने के लिए कर रहे हैं या सही में दलित समाज का भला चाहते हैं। हम यह आजमाना चाहते हैं कि कांग्रेस के दिल में बदलाव आया है।

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राजरत्न ने कहा कि कई बार कथित बुद्धिजीवी जो कानून के क्षेत्र से जुड़े हैं, उनका बयान आता है कि बाबा साहेब ने संविधान ही नहीं तैयार किया या उनका संविधान बनने में महत्वपूर्ण योगदान नहीं था। वे बीएन राव को आगे करते हैं। राव सहित कई लोगों का योगदान संविधान बनाने में रहा है। 25 नवंबर 1949 को संविधान तैयार हुआ तो बीएन राव ने कहा था कि संविधान निर्माण कमेटी के कई लोगों में से कुछ बीमार हो गए या विदेश चले गए, पूरा काम बाबा साहेब पर आ गया।

 

बाबा साहेब ने संविधान देते हुए कहा था कि संविधान कितना भी अच्छा हो, उसे लागू करने वाले यदि गलत हैं तो संविधान किसी भी काम का नहीं होगा। आज यह बात चल रही है कि संविधान में कमियां हैं, लेकिन सही बात तो यह है कि संविधान को कायम करने वालों में कमियां हैं।


अगर देश का संविधान कमजोर हो और चलाने वाले अच्छे हों तो संविधान अच्छा साबित होता है। बाबा साहेब की जात क्या थी, वे किस धर्म से थे, यह बात थोड़ी देर के लिए अलग रखें और यह सोचें कि एक भारतीय के तौर पर उन्होंने देश को क्या दिया तो लोग उनके व्यक्तित्व को समझ पाएंगे। वे विदेश से पढ़कर भारत आए। वे जात-पात का भेद मिटाना चाहते थे।

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