इंदौर में एक उद्योगपति की बहू वंदना गुप्ता के साथ 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। इसमें ठगों ने सीबीआई और बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया और उन्हें स्काय एप के जरिए "डिजिटल अरेस्ट" का झांसा देकर रकम ट्रांसफर करवा ली। इस ठगी की घटना को मलेशिया में बैठे ठगों ने अंजाम दिया। ठगों ने वंदना को बैंक अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बनकर कॉल किया और विभिन्न थानों के अफसरों के नाम पर बातचीत करवाई। उन्होंने स्काय एप डाउनलोड करवाकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और कैमरे के सामने उनसे ट्रांजेक्शन कराया। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से दो सूरत (गुजरात) और दो सतना (मध्य प्रदेश) के रहने वाले हैं।
किराए पर लिए गए बैंक खाते
गिरफ्तार आरोपियों में सूरत के प्रतीक और अभिषेक और सतना के मैहर से चंद्रभान बंसल और उनके बेटे राकेश बंसल शामिल हैं। पुलिस की जांच में पता चला कि इनके नाम से सिम कार्ड और बैंक अकाउंट बने। इन्हें ठगों ने लिया और अपराध को अंजाम दिया। ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा इन आरोपियों के खातों में ट्रांसफर किया गया था। राकेश बंसल के पिता के खाते में ₹10 लाख और सूरत के प्रतीक व अभिषेक के खातों में ₹5 लाख का ट्रांजेक्शन हुआ। पुलिस ने इन सभी बैंक खातों को सीज कर दिया है। पुलिस को शक है कि बैंक खाते किराए पर लिए गए थे। पैसे खातों में ट्रांसफर करवाने के लिए इन चारों ने कमीशन लिया था।
डिलीवरी बॉय का काम करते हैं युवक
डीसीपी राजेश सिंह के मुताबिक प्रतीक और अभिषेक ऑनलाइन डिलीवरी का काम करते है। वहीं राकेश भी अपने गांव में छोटा-मोटा काम करता है। मलेशिया में बैठे ठगों ने इनकी सिम से अकाउंट खुलवाए और इसके बाद उसमें रुपए डलवाए। आरोपियों ने बताया कि यह सबी अकाउंट तीन माह पहले ही खुलवाए गए थे।
किराए पर बैंक अकाउंट लिए
आरोपी किराए पर बैंक अकाउंट देकर इस ठगी में शामिल हुए थे। पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपियों ने तीन महीने पहले अपने नाम से खाते खुलवाए थे। प्रतीक और अभिषेक ऑनलाइन डिलीवरी का काम करते हैं, जबकि राकेश छोटे-मोटे काम करता है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने लालच या कमीशन के बदले अपने खातों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश सिंह ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही पूरे ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
एडवायजरी जारी
पुलिस ने सभी को सतर्क रहने की सीख दी है। किसी भी अज्ञात कॉल पर निजी जानकारी साझा करने से बचें, संदिग्ध एप डाउनलोड करने से पहले जांच करें, और यदि बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर कोई संपर्क करता है, तो सीधे संबंधित संस्थान के आधिकारिक नंबर पर सत्यापन करें।
नेशनल साइबर हेल्पलाइन
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इंदौर पुलिस साइबर हेल्पलाइन 7049124445
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