नगर निगम बारिश के दौरान नई तकनीक से पेचवर्क कर गड्ढे भरने का दावा कर रहा है, लेकिन हालात बता रहे हैं कि मरम्मत के बावजूद सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो पा रही हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि सोमवार को गड्ढे की वजह से एक बाइक सवार की जान भी चली गई।
इंदौर की सड़कों के गड्ढे एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। पिछली बारिश में गड्ढों को लेकर नगर निगम की काफी किरकिरी हुई थी। उससे सबक लेकर इस बार बारिश में ही नई तकनीक से गड्ढे भरने का काम अफसर करवा रहे हैं, लेकिन गड्ढे फिर भी नहीं भर पा रहे हैं।
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गड्ढे के कारण सोमवार को एक बाइक सवार अपनी जान भी गंवा चुका है। चाहे शहर से गुजरने वाले हाईवे हों या गलियों की सड़कें, वाहन चालक सभी मार्गों पर गड्ढों से दो-चार हो रहे हैं। इंदौर में बारिश इस बार 20 इंच भी नहीं हो पाई है, लेकिन फिर भी डामर ने सड़कों का साथ छोड़ दिया।
शहर के एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर और विजय नगर क्षेत्र में ब्रिज का काम चल रहा है। यहां सर्विस रोड पर सबसे ज्यादा गड्ढे हैं। सत्यसाईं चौराहा और निरंजनपुर चौराहा पर वाहन चालक कई बार गड्ढों के कारण गिर चुके हैं।
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इसके अलावा, इंदौर बायपास पर एमआर-10 जंक्शन के ट्रैफिक को भी स्कीम नंबर 134 की तरफ मोड़ दिया गया है। इस कॉलोनी की सड़कों का आधा किलोमीटर हिस्सा भी साबूत नहीं बचा है, जबकि पूरी कॉलोनी में सीमेंट की सड़कों का जाल बिछा है। ट्रैफिक का दबाव ज्यादा होने के कारण यहां सड़कों की मरम्मत भी नहीं हो पा रही है।
इंदौर में हाल ही में एक नई सड़क पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान टूट गई। उस सड़क पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। नेता प्रतिपक्ष सोनाली मिमरोट का कहना है कि निर्माण एजेंसियों को जब भी ठेका दिया जाता है, तो गारंटी पीरियड में सड़कें ठीक होनी चाहिए, लेकिन कई सड़कें तीन साल भी नहीं टिक पा रही हैं।
नगर निगम की जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने कहा कि जिन मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है, वहां हम रात के समय पेचवर्क करवा रहे हैं। इस बार वर्षाकाल के दौरान ही गड्ढे भरे जा रहे हैं।