इंदौर में कलेक्टर द्वारा शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की मुहिम के खिलाफ शुक्रवार को बड़ी संख्या में भिक्षुक, दिव्यांग और कुष्ठ पीड़ित कलेक्टर कार्यालय पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें भिक्षा मांगने की अनुमति दी जाए या उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी ली जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा पेंशन के नाम पर दिए जा रहे 600 रुपए और राशन से उनके परिवार का गुजारा संभव नहीं है। प्रदर्शन में शामिल कुष्ठ पीड़ितों और भिक्षुकों ने संघ का निर्माण कर लिया है, जिसमें सहयोग कुष्ठ निवारण संघ और दिव्यांग हितग्राही भी शामिल हैं। संघ के अध्यक्ष सारंग गायघने और सुभाष भरवाड़ ने बताया कि उनका जीवन भिक्षावृत्ति पर निर्भर है, और कलेक्टर आशीष सिंह द्वारा 1 जनवरी से भिक्षा देने और लेने वालों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश उनके जीवनयापन के अधिकार का हनन हैं।
5 हजार रुपए मासिक सहायता की मांग की
कलेक्टर द्वारा चलाई जा रही दीनदयाल रसोई योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों को मात्र पांच रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मजदूर चौराहों और रैन बसेरों पर भी यह सुविधा नगर निगम द्वारा दी जा रही है। शहर की कई सामाजिक संस्थाएं भी इसी तरह की योजनाओं में योगदान दे रही हैं। परदेशीपुरा क्षेत्र में साईं मंदिर समिति द्वारा भी पांच रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने प्रति माह 5 हजार रुपए की सहायता राशि की मांग की। उन्होंने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि आंध्रप्रदेश में 6 से 15 हजार रुपए, दिल्ली और हरियाणा में 3 हजार रुपए, और महाराष्ट्र में 4 हजार रुपए मासिक सहायता दी जाती है। इंदौर में भी कम से कम 5 हजार रुपए मासिक सहायता की मांग की गई।
कलेक्टर कर रहे रोजगार प्रशिक्षण की व्यवस्था
कलेक्टर आशीष सिंह ने प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट जवाब दिया कि शहर में भिक्षावृत्ति की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि निसहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए उज्जैन के सेवाधाम में इलाज और रोजगार के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। साथ ही, हातोद के पास पितृ पर्वत क्षेत्र में कुष्ठ रोगियों को घर और खेती के लिए जमीन भी दी गई है। कुष्ठ रोगियों का कहना है कि पेंशन और राशन की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि 2011 में भी उन्होंने मुख्यमंत्री से 5 हजार रुपए मासिक सहायता की मांग की थी, लेकिन इसे अब तक पूरा नहीं किया गया। प्रदर्शनकारी देर शाम तक अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते रहे।