एमवाय के एनआईसीयू में चूहों का वीडियो
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
1. एनआईसीयू (NICU) में चूहों द्वारा नवजातों को कुतरने की घटना (2025)
यह अस्पताल के इतिहास की सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाली घटनाओं में से एक है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। सितंबर 2025 में अस्पताल के अति-सुरक्षित माने जाने वाले नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में चूहों ने भर्ती दो नवजात बच्चियों को कुतर दिया था। एक बच्ची के हाथ की उंगलियों और दूसरी के सिर व कंधे पर चूहों के काटने के गहरे निशान मिले थे। घटना के कुछ ही दिनों बाद दोनों गंभीर रूप से बीमार बच्चियों की मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि मौतें जन्मजात विकृतियों और संक्रमण के कारण हुईं, लेकिन इस गंभीर लापरवाही पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद अस्पताल के अधीक्षक लंबे अवकाश पर चले गए और कई नर्सिंग स्टाफ व पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर सख्त कार्रवाई की गई।
2. ऑक्सीजन की जगह नाइट्रस ऑक्साइड गैस की सप्लाई (2016)
अस्पताल के नवनिर्मित पीडियाट्रिक ऑपरेशन थिएटर (OT) में तकनीकी रूप से बेहद गंभीर मानवीय चूक सामने आई थी। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में गैस पाइपलाइन की वेल्डिंग और फिटिंग में इतनी बड़ी लापरवाही हुई थी कि ऑक्सीजन की लाइन में 'नाइट्रस ऑक्साइड' (एनेस्थीसिया के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस) जोड़ दी गई थी। इसके कारण ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन की जगह इस गैस के फेफड़ों में जाने से दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस मेडिकल ब्लंडर ने पूरे देश के चिकित्सा जगत को झकझोर दिया था।
3. 24 घंटे में 17 मरीजों की मौत का विवाद (2017)
जून 2017 में अस्पताल पर एक ही रात में रिकॉर्ड संख्या में मौतें होने का गंभीर आरोप लगा था। स्थानीय मीडिया और परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन की सेंट्रल सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित हो गई थी, जिसके कारण आईसीयू और विभिन्न वार्डों में भर्ती 17 मरीजों की जान चली गई। तत्कालीन संभागायुक्त और अस्पताल प्रशासन ने ऑक्सीजन कट की बात को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे सामान्य मौतें बताया था। उनका तर्क था कि इतने बड़े अस्पताल में गंभीर रूप से आने वाले मरीजों के कारण रोजाना औसतन 10 से 20 मौतें होना रूटीन का हिस्सा है।
4. नवजात शिशु वार्ड (NICU) में भीषण आग (2017)
नवंबर 2017 में अस्पताल के दूसरे माले पर स्थित एनआईसीयू के 'आउट-बॉर्न यूनिट' में अचानक शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई थी। आग के वक्त वार्ड के वेंटिलेटर्स पर 47 नवजात बच्चे मौजूद थे। पूरे वार्ड में घना और जहरीला धुआं फैल गया था। गनीमत यह रही कि डॉक्टरों और सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए धुएं के बीच से सभी 47 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया और एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल के कमजोर इलेक्ट्रिकल सिस्टम और पुख्ता फायर सेफ्टी के अभाव की पोल खोलकर रख दी थी।
5. जूनियर डॉक्टरों के साथ आए दिन होने वाली मारपीट और हड़तालें
चूंकि एमवाय अस्पताल पर मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है, इसलिए यहां डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच विवाद की बड़ी घटनाएं आम हैं। हाल ही में, एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करने की बात को लेकर परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों और सुरक्षा गार्डों पर जानलेवा हमला कर दिया था, जिसमें तीन डॉक्टर घायल हुए थे। ऐसी हिंसक घटनाओं के विरोध में जूनियर डॉक्टर्स (जूडा) कई बार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा चुके हैं, जिससे इंदौर की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती रही है।