इस वर्ष मानसून इंदौर क्षेत्र से रूठा हुआ प्रतीत हो रहा है। रोजाना आसमान में बादल तो घिरते हैं, लेकिन जोरदार बारिश नहीं हो रही है। इसके परिणामस्वरूप अब तक शहर में केवल 440 मिमी यानी करीब 18 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। तेज बारिश की झड़ी एक बार भी न लगने की वजह से इंदौर जिले के सभी प्रमुख जलस्रोत अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं भर पाए हैं। स्थिति यह है कि शहर का प्रमुख यशवंत सागर जलाशय भी इस बार ओवरफ्लो नहीं हो पाया है।
इंदौर जिले के प्रमुख तालाबों का हाल
मौसम विशेषज्ञों ने इस बार अलनीनो के प्रभाव के चलते कमजोर मानसून की भविष्यवाणी की थी। इसके बावजूद आश्चर्य की बात यह रही कि इंदौर के आसपास के इलाकों में तो पानी गिरता रहा, लेकिन शहर के भीतर केवल रिमझिम या हल्की फुहारें ही बरसती रहीं। इस सीजन में अभी तक एक बार भी 3 से 4 इंच पानी एक साथ नहीं बरसा, जिससे नदी, नाले और तालाब लबालब भर सकें। वर्तमान में यशवंत सागर 5 से 6 फीट खाली पड़ा है। इसके अलावा पीपल्यापाला, बिलावली, लिम्बोदी और सिरपुर सहित अन्य स्थानीय तालाब भी अपनी क्षमता के अनुसार नहीं भर सके हैं।
प्रदेश के बड़े बांधों की स्थिति
यही स्थिति केवल इंदौर तक सीमित न रहकर पूरे राज्य के जलाशयों में देखने को मिल रही है। प्रदेश के 54 प्रमुख बड़े बांध लगभग 36 प्रतिशत तक खाली पड़े हैं। इन बांधों में केवल 60 से 64 प्रतिशत तक ही जलभराव हो पाया है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने स्थिति को देखते हुए सभी बांधों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग करने और बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे चालू रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।
विभिन्न जलाशयों का जलस्तर और औसत बारिश
राज्य के प्रमुख बांधों में से राजघाट और बरगी बांध 86 प्रतिशत तक भर चुके हैं। इसके विपरीत कोलार, बारना, बाण सागर, गांधी सागर, इंदिरा सागर और तवा बांध में केवल 46 प्रतिशत से लेकर 76 प्रतिशत तक ही पानी जमा हुआ है। वहीं ओंकारेश्वर बांध में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां अब तक मात्र 30 प्रतिशत ही जलभराव हुआ है। आधा मानसून बीत जाने के बाद भी केवल 4 बांधों के गेट ही अतिरिक्त पानी निकासी के लिए खोलने पड़े हैं। पूरे प्रदेश में अब तक औसतन 584 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो सामान्य से 12 से 15 प्रतिशत कम है। इंदौर में आमतौर पर 34 से 35 इंच बारिश को सामान्य माना जाता है, जिसकी तुलना में अभी तक लगभग आधी बारिश ही दर्ज हुई है।