शहर के प्रतिष्ठित 150 साल पुराने डेली कॉलेज (Daly College) में संविधान संशोधन को लेकर चल रहा विवाद गहराता जा रहा है। इसी कानूनी पेंच के चलते बुधवार को प्रस्तावित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की महत्वपूर्ण बैठक 7 घंटे के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार स्थगित कर दी गई।
सुबह से शाम तक चला इंतजार का दौर
बोर्ड की यह बैठक बुधवार सुबह 9.30 बजे शुरू होनी थी, जिसे लेकर दिनभर गहमागहमी मची रही। बैठक के लिए बोर्ड के सदस्य सुबह ही पहुंच गए थे, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण चर्चा शुरू नहीं हो सकी। शाम 4.30 बजे बोर्ड के अध्यक्ष विक्रम सिंह पंवार ने बैठक स्थगित करने की आधिकारिक सूचना सदस्यों को दी। फिलहाल बैठक की अगली तारीख तय नहीं की गई है। बोर्ड का कहना है कि डेली कॉलेज के संविधान संशोधन का मामला इंदौर हाई कोर्ट, भोपाल रजिस्ट्रार ऑफिस और इंदौर फर्म्स एंड सोसायटी में विचाराधीन है। चूंकि मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में है, इसलिए कोर्ट के आदेश के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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सहायक पंजीयक के आदेश से बढ़ा विवाद
बैठक स्थगित होने का मुख्य कारण 10 नवंबर को सहायक पंजीयक (Assistant Registrar) बी.डी. कुबेर द्वारा जारी किया गया आदेश था। इस आदेश के तहत बैठक में संविधान संशोधन पर रोक लगा दी गई थी। पेंच यह फंसा कि बुधवार की बैठक के एजेंडे में शामिल अधिकतर बिंदु संविधान संशोधन से ही जुड़े हुए थे, जिस पर चर्चा करना कानूनी रूप से संभव नहीं था।
हाई कोर्ट में 16 मिनट चली सुनवाई
इस मामले में बोर्ड सदस्य संदीप पारीख ने संविधान संशोधन के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। बुधवार को जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट में इस पर करीब 16 मिनट तक सुनवाई हुई। फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिकाकर्ता का तर्क: एडवोकेट पीयूष पाराशर ने तर्क दिया कि जब मामला रजिस्ट्रार के पास विचाराधीन है, तो बोर्ड बैठक में संशोधन पर फैसला कैसे ले सकता है?
बोर्ड का पक्ष: बोर्ड के वकील ने दलील दी कि सहायक पंजीयक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर संशोधन पर रोक लगाई है।
एक सदस्य को छोड़कर सभी पहुंचे
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में कुल 9 सदस्य हैं, जिनमें से 8 सदस्य तय समय पर बैठक के लिए पहुंच गए थे। केवल नरेंद्र सिंह झाबुआ स्वास्थ्य कारणों के चलते बैठक में शामिल नहीं हो सके। एक सप्ताह बाद दोबारा बैठक होने की संभावना जताई जा रही है।