सरकारी कामों में देर न हो तो वह सरकारी काम कहलाएंगे ही नहीं। कुछ यही बात साबित हो रही है पीपल्याहाना तालाब के पास निर्मित की जा रही जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग के काम में। कई बार मंत्री की फटकार लगने के बाद भी इसके काम में कोई सुधार नहीं हो रहा है। बारिश आते ही चारों तरफ मलबा फैल रहा है और तालाब में भी गंदगी जमा हो रही है। लोक निर्माण विभाग न तो समय पर सड़कों-फ्लायओवरों का निर्माण कर पाता है और न ही पीपल्याहाना में बन रही कोर्ट बिल्डिंग का काम पूरा कर पा रहा है। इस प्रोजेक्ट का टेंडर तीन बार निरस्त हुआ है और ठेकेदार फर्म के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर के बाद उसे जेल भी भिजवाया गया है। इसके बावजूद भी प्रोजेक्ट में सुधार नजर नहीं आ रहा है। वहीं बार बार नए सिरे से टेंडर जारी करने के चक्कर में लागत तो बढ़ ही रही है और अभी तक बिल्डिंग भी अधूरी ही है।
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नाराज हुए थे मंत्री
कुछ दिन पहले लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी कोर्ट बिल्डिंग के अधूरे काम पर निरीक्षण के दौरान नाराज हुए और हर हफ्ते रिपोर्ट मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग पीपल्याहाना तालाब के पास निर्मित की जा रही है, जो लेटलतीफी का शिकार हुई, जबकि 6 साल पहले इसका निर्माण शुरू हुआ था और तीन साल के भीतर बनकर तैयार हो जाना थी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह परियोजना शासन की प्राथमिकताओं में है तथा इसे तय समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाना चाहिए।
तीन बार टेंडर निरस्त हुए, एफआईआर भी हुई
तीन बार इसके टेंडर निरस्त भी हुए और एक फर्म के संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर तक दर्ज कराई गई। अभी तक ड्राइंग डिजाइन के साथ निर्माण सामग्री की मंजूरी में भी विलंब जैसी बातें सामने आईं जिसके चलते विभागीय मंत्री ने आर्किटेक्ट और संबंधित अभियंता के खिलाफ भी कार्रवाई करने का कहा।
मंत्री ने दो शिफ्ट में काम करने को कहा था
कुछ दिन पहले आए मंत्री सिंह ने ठेकेदार को निर्देशित किया कि कम से कम दो शिफ्टों में कार्य किया जाए और पर्याप्त मैनपावर तैनात रहे। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निर्माण कार्य की प्रगति का विश्लेषण साप्ताहिक आधार पर रिपोर्टचार्ट के माध्यम से करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि संभावित अवरोधों की पूर्व पहचान कर उनके निराकरण की योजना बनाई जा सके।
पहले भी लग चुकी है फटकार
गौरतलब है कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा इससे पहले हुए एक बैठक में भी यह निर्देश दिए गए थे कि निर्माण कार्य को प्रतिदिन तीन शिफ्टों में संचालित किया जाए तथा कार्य की सतत निगरानी के लिए निर्माण स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशाला में सभी आवश्यक परीक्षण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।