इंदौर नगर निगम को 10 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है। इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों पर विपक्ष के नेता चिंटू चौकसे ने मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। चौकसे ने आरोप लगाते हुए कहा कि महापौर ने इंदौर नगर निगम को "अंधेर नगरी चौपट राजा" की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि निगम में अधिकारी और ठेकेदार आपसी मिलीभगत से काम करते हुए नगर निगम के राजस्व को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस मामले को चिंटू चौकसे ने बुधवार को उठाया और इसी दिन मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी।
राज्य सरकार का आदेश भी नहीं मान रहे
लगातार सामने आ रही थी धांधली, आंखें मूंदे बैठे रहे जिम्मेदार
चौकसे ने बताया कि नगर निगम ने कोरोना काल का बहाना बनाकर इस कंपनी को छूट देकर ठेके को निरंतर जारी रखने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को गलत ठहराते हुए नगर निगम और सिटी बस कंपनी को पत्र भी लिखा और स्पष्ट कहा कि इस तरह की छूट देना उचित नहीं है। शासन ने निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से होने वाली टैक्स चोरी और निजी लाभ के इस खेल को उजागर किया। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी अब भी अपने हितों के कारण इस कंपनी के विज्ञापन बोर्ड लगे रहने दे रहे हैं और उसका कोई शुल्क नहीं ले रहे हैं।
कंपनी ने सरकारी संपत्ति भी हड़प ली
महापौर खुद शिकायत दर्ज करवाएं
चौकसे ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि महापौर इस मामले में संलिप्त नहीं हैं, तो उन्हें स्वयं लोकायुक्त में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा, इसमें संलिप्त अधिकारियों को तत्काल जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। राज्य शासन को भी इस पूरे मामले की रिपोर्ट भेजकर विशेष जांच दल (SIT) बनाकर जांच कराने का आग्रह किया गया है।