दरवाजे पर डोर कैमरे व फिंगरप्रिंट लाॅक थे।
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इंदौर में आटोमोबाइल शोरुम के मालिक प्रवेश अग्रवाल की मौत फेफड़ों में कार्बन मोनोआक्साइड गैस की ज्यादा मात्रा में जाने से हुई। जिस हिस्से में आग लगी, वहां दो खिड़कियां थी, यदि वे खुली रहती तो हादसे की भयवाहता कम होती और अनहोनी टल सकती है। प्रवेश ने अपने तीन मंजिला शोरुम में तो फायर अलार्म की व्यवस्था की थी, लेकिन पेंट हाउस में फायर अलार्म नहीं लगाए। यदि इसका ध्यान रखा होता तो भी प्रवेश की जान बच सकती थी।
बेटी के कमरे में भरा था ज्यादा धुंआ
बेटी सौम्या का कमरा पूजा घर के पास है। सबसे पहले आग पूजाघर में लगी और बेटी के कमरे तक पहुंची। बेटी हादसे से डर गई और खुद बचने के बजाए मदद के लिए चिल्लाने लगी। प्रवेश उनकी पत्नी और बेटी जिस कमरे में थे,वहां तक हादसे के बाद ज्यादा धुंआ नहीं घुसा था। इस कारण बेटी और पत्नी को उन्होंने आसानी से निकाल दिया, लेकिन दूसरे कमरे में सो रही बेटी सौम्या के कमरे तक जाने और वहां से उसे निकालने की जद्दोजहद के कारण उनका दम घुट गया। उधर बड़ी बेटी सौम्या का निजी अस्पताल में इलाज जारी है। वह हादसे से बेहद डरी हुई है। सौम्या को शनिवार को भी पिता की मौत के बारे में नहीं बताया गया है। उनके फेफड़ों में भी विषैला धुंआ भरा था। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है।
आपको बता दें, गुरुवार को इंदौर में देवास नाका स्थित महिंद्रा मोटर्स के शोरूम के भवन के पेंट हाउस स्थित घर में आग लगने से प्रवेश अग्रवाल की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी श्वेता और दो बेटियों सौम्या और मायरा को उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर बचा लिया। इसी दौरान धुएं से उनका दम घुट गया और उनकी मौत हो गई थी। इस हृदय विदारक हादसे से पूरा इंदौर व्यथित है। प्रवेश अग्रवाल की पत्नी व छोटी बेटी मायरा की हालत ठीक है, जबकि सौम्या, जिसके नाम पर अग्रवाल का कार शोरूम सौम्या ऑटोमोबाइल है, उसकी हालत में अब सुधार आ रहा है।