इंदौर में रात के समय मशीनों से सफाई होती थी,लेकिन स्वच्छता रैंकिंग सर्वेक्षण की टीम आने से पहले शहर को साफ रखने के लिए दिन में भी मशीनों से सफाई हो रही है। इंदौर मेें कई जगह सीवरेज और नर्मदा लाइन के काम चल रहे है। इस कारण धूल भी ज्यादा हैै।
इंदौर में चार माह के भीतर स्वच्छता रैंकिंग को परखने के लिए टीम आएगी। अलग-अलग स्तरों पर शहर के सफाई को देखा जाएगा, लेकिन इस बार इंदौर इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। बीते दो माह से नगर निगम का अमला लोकसभा चुनाव के काम में जुटा था, लेकिन अब नए निगमायुक्त शिवम वर्मा को स्वच्छता रैंकिंग की चिंता सताने लगी है।
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इंदौर में जो भी निगमायुक्त छह सालों में पदस्थ रहे हैं। उनकी कोशिश यही रहती थी कि उनके कार्यकाल में इंदौर स्वच्छता में न पिछड़े। निगमायुक्त रहे मनीष सिंह ने पहली बार स्वच्छता अवॉर्ड नगर निगम को दिलाया। इसके बाद आशीष सिंह, प्रतिभा पाल और हर्षिका सिंह ने सफाई व्यवस्था को बरकरार रखा, लेकिन सातवीं बार इंदौर के साथ सूरत को भी संयुक्त रूप से स्वच्छता रैकिंग का पुरस्कार मिला। दोनों शहरों के नंबर समान थे। तीन माह पहले इंदौर में पदस्थ हुए निगमायुक्त शिवम वर्मा के लिए आठवीं बार स्वच्छता रैंकिंग को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है, क्योंकि शहर की सफाई व्यवस्था मेें पहले की तुलना में ढिलाई आई है। शहरवासी भी अब पहले जैसे जागरूक नहीं रहे। कचरा खाली प्लॉटों, बैकलेन और सार्वजनिक स्थलों पर नजर आने लगा है।
दिन में मशीनों से सफाई
इंदौर में रात के समय मशीनों से सफाई होती थी, लेकिन स्वच्छता रैंकिंग सर्वेक्षण की टीम आने से पहले शहर को साफ रखने के लिए दिन में भी मशीनों से सफाई हो रही है। इंदौर में कई जगह स्टार्म वाटर लाइन, सीवरेज और नर्मदा लाइन के काम चल रहे है। इस कारण धूल भी ज्यादा है। उसे साफ करने के लिए मशीनों का उपयोग हो रहा है। आने वाले दिनों में इंदौर के डिवाइडरों का रंग-रोगन होगा। इसके अलावा दीवारों पर पेटिंग भी कराई जाएगी। शहर में नो थू-थू अभियान, मैं हूं झोलाधारी अभियान भी चलाया जा रहा है।
सफाई में अब पहले जैसी बात नहीं
- शहर में कचरे से सीएनजी बनाने के लिए करोड़ों रुपये का प्लांट स्थापित किया गया, लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रहा है।
- नालों के शुद्धिकरण की योजना फ्लाॅप साबित हुई। ट्रीटमेंट प्लांट भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।
-कचरे से इंदौर में बिजली तैयार नहीं हो रही है। कई शहरों में इसके प्लांट भी लगे हैं।
-शहर अमानक प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है।