शहर में भूजल स्तर को बढ़ाने और वर्षा जल के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। निगम प्रशासन की ओर से अब इस मामले में पूरी तरह से सख्ती बरतनी शुरू कर दी गई है। शहर की कई बड़ी बहुमंजिला इमारतों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा निजी संस्थानों की लगातार जांच की जा रही है। जिन स्थानों पर नोटिस दिए जाने के बाद भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित नहीं किए गए हैं, वहां जल कार्य विभाग की टीमों द्वारा मौके पर ही चालानी कार्रवाई की जा रही है और भारी जुर्माना वसूला जा रहा है। अब तक ऐसे 80 से अधिक बड़े संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए चालान बनाए जा चुके हैं।
19,700 सिस्टम लगाए जा चुके
चालानी कार्रवाई के साथ-साथ शहर में नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का काम भी तेजी से जारी है। निगम द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक शहर भर में लगभग 19,700 सिस्टम लगाए जा चुके हैं। निगम प्रशासन ने इस मानसून सत्र के लिए कुल 25,000 सिस्टम स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि इस दौरान शहर में औसत वर्षा का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया है, फिर भी निगम की विभिन्न टीमें पूरी मुस्तैदी से अपने अभियान में जुटी हुई हैं। कई रहवासी कल्याण संघों तथा प्रमुख व्यावसायिक परिसरों को नए नोटिस जारी कर जल्द से जल्द सिस्टम लगाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हाल ही में निगम टीम ने स्कीम नंबर 54 पीयू-4 सहित कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाकर नियमानुसार जुर्माना लगाया।
पिछले रिकॉर्ड को दोहराने की तैयारी और प्रशासनिक निर्देश
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, विगत वर्ष 2025-26 के दौरान भी निगम द्वारा दिए गए नोटिसों और जागरूकता अभियान के बाद नागरिकों तथा संस्थानों द्वारा रिकॉर्ड 25,588 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए थे। इसी सफलता को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी जल कार्य विभाग की टीमों ने पूरे शहर में सघन अभियान शुरू किया है। विभिन्न वार्डों में स्थित आवासीय क्षेत्रों और बड़े व्यापारिक केंद्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जल संरक्षण के इन नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कानूनी व वित्तीय कार्रवाई जारी रहेगी।