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Indore Lit Chowk: फिल्म अभिनेता विनय पाठक बोले- मन की खुशी के लिए नाटक करता हूं, पैसों की जरूरत के लिए फिल्में

Sun, 22 Dec 2024 07:32 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर के लिट चौक फेस्टिवल में अभिनेता विनय पाठक, अनूप सोनी और गजराज राव ने अभिनय, थिएटर और सिनेमा पर चर्चा की। विनय ने नाटक को सुकून देने वाला बताया, जबकि गजराज ने सिनेमा में नाटक जैसा आनंद नहीं मिलने की बात कही। 
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लिट चौक में पहुंचे अभिनेता विनय पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आयोजित लिट चौक फेस्टिवल में फिल्म अभिनेता विनय पाठक दर्शकों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि एक्टिंग कोई अनोखी बात नहीं है। सब के भीतर एक अभिनेता होता है। अभिनय हम अपने जीवन में करते हैं। घर पर जब  रिश्तेदार आते हैं तो हम स्वांग करते हैं। फूफा को देखने चेहरा सुखद बना लेते हैं, जबकि भीतर से मन नहीं होता। वो शिष्टाचार भी अभिनय ही है।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मन की खुशी के लिए नाटक करता हूं, पैसे की जरूरत के लिए फिल्में। नाटक सुकून देते हैं। भीतर के इंसान और अभिनेता को जिंदा रखता है, जो थिएटर करना चाहते हैं वो समय निकाल लेते हैं। थिएटर का कलाकार ज्यादा श्रेष्ठ है, फिल्म का कलाकार कम... इसे आंकना नहीं चाहिए। सब अपने अपने काम में बेहतर करते हैं।

बॉक्स ऑफिस से मिलती है पावर
अभिनेता विनय ने कहा कि मुंबई में बॉक्स ऑफिस पर  जो बजना शुरू होता है, उसे पावर मिल जाती है। जब मेरा मौका आया तो उस समय को मैं भुनाना चाहता था। तब एक फिल्म बनाई, लेकिन फिल्म नहीं चली। मैं अब तक मिले कामों से खुश हूं।
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लिट चौक में अभिनेता अनूप सोनी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आर्ट वास्तविकता से दूर नहीं है। भारतीय दर्शकों के दिल को सिनेमा स्पर्श करता है। अभिनय का असर दर्शकों को लंबे समय तक रहता है। उन्होंने कहा कि  पुराने दौर में हीरो शर्ट खोलकर अभिनय नहीं करते थे, लेकिन फिट रहने पर ध्यान देते थे। मैं भी फिट रहने पर ही जोर देता हूं। रोज वर्कआउट करता हूं।

नाटक का आनंद सिनेमा में नहीं मिलता
लिट चौक में फिल्म अभिनेता गजराज राव ने कहा कि मुझे रंगमंच से प्रेम है। नाटक का आनंद सिनेमा में नहीं मिल सकता। थिएटर समय मांगता है, लेकिन आर्थिक पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ पीछे छूट गया। जिंदगी की चूहा दौड़ में कुछ अधूरा रह जाता है। उन्होंने कहा कि आजकल दर्शक एक जैसे नहीं होते। दर्शक अलग-अलग अंदाज की फिल्म पसंद करते हैं। कुछ दर्शकों को लापता लेडीज पसंद है, तो कुछ पुष्पा जैसी फिल्म पसंद करते हैं। आजकल कंटेंट मायने रखता है।
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