इंदौर में हुए भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की रिपोर्ट को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को नगर निगम की तरफ से जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। सरकार नहीं चाहती थी कि रिपोर्ट सार्वजनिक हो। जांच रिपोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश भी की गई है। अब हम इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे।
शुक्रवार को रेसीडेंसी कोठी में मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी और न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि यह घटना स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर शहर में नागरिकों के जीवन, सुरक्षित पेयजल, प्रशासनिक जवाबदेही और नगर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने पेयजल प्रदूषण के कारणों, बीमारी एवं मौतों, प्रशासनिक और तकनीकी खामियों तथा जिम्मेदारी की जांच की। आयोग की रिपोर्ट में पेयजल के दूषित होने, प्रशासनिक देरी और महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। मेयर पुष्यमित्र भार्गव के यहां 66 दिनों तक फाइल अटकी रही, लेकिन उन्हें जिम्मेदार नहीं माना गया।
उन्होंने कहा कि इंदौर को स्वच्छता के नाम पर मेडल मिलते रहे हैं, लेकिन जनता को पीने का पानी नहीं मिल रहा। मैंने इंदौर में 7 जनवरी को वॉटर ऑडिट किया था। पानी में घातक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले। अभी भी हालात नहीं सुधरे हैं। मूलभूत सुविधाएं देने की जिम्मेदारी सरकार पर है, लेकिन वे इसमें विफल साबित हो रही हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बावजूद सरकार की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया, जबकि 36 मौतों के बाद तो दोषी अफसरों पर केस दर्ज होना चाहिए था। सिंघार ने कहा कि इस मुद्दे को अब विधानसभा में भी उठाया जाएगा।