इंदौर में जत्रा मराठी वारसा फेस्टिवल शुरू
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इंदौर के गुजराती स्कूल परिसर में शुक्रवार शाम से ही जत्रा में उत्सवी माहौल नजर आया। परिसर को भगवा थीम पर सजाया गया है, वहीं महाराष्ट्र के ऐतिहासिक गौरव को दर्शाने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रतापगढ़ किले की प्रतिकृति भी बनाई गई है। मेले में प्रवेश करते ही मराठी व्यंजनों की खुशबू लोगों को आकर्षित कर रही है। पारंपरिक खानपान से लेकर महाराष्ट्र की लोककलाओं तक, यहां प्रदेश की संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं।
आयोजन समिति की अध्यक्ष स्वाति काशिद ने बताया कि मेले में मराठी व्यंजनों के 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें झुणका-भाकर, बटाटा भाजी, पुरणपोली और पातल भाजी सहित कई पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इस बार मेले में पहली बार कढ़ी कोडूले और मोदक ची भाजी जैसे व्यंजन भी शामिल किए गए हैं। इन नए व्यंजनों के जरिए लोगों को महाराष्ट्र के पारंपरिक खानपान की विविधता से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
लावणी की प्रस्तुति ने बांधा समां
जत्रा के पहले दिन शुक्रवार शाम को लावणी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य की लय ने पूरे परिसर में उत्सव का रंग घोल दिया। आयोजन के लिए महाराष्ट्राचे मानकरी नाम की कलाकारों की टीम इंदौर पहुंची है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में कलाकार महाराष्ट्र की लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।लावणी के साथ आई चा गोंधळ, विट्ठल-रुक्मिणी और स्वामी समर्थ जैसे विषयों पर भी विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
महाराष्ट्र की परंपराओं का दिख रहा अनूठा संगम
मेले में सजावट से लेकर खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक महाराष्ट्र की परंपराओं को प्रमुखता दी गई है। भगवा थीम पर सजा परिसर और प्रतापगढ़ किले की प्रतिकृति आयोजन को विशेष रूप दे रही है। वहीं, पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल पर लोगों को अलग-अलग स्वाद चखने का अवसर मिल रहा है। सांस्कृतिक मंच पर होने वाली प्रस्तुतियां इस अनुभव को और खास बना रही हैं।
उद्घाटन के अवसर पर अण्णा महाराज ने कहा कि मराठी संस्कृति सदैव आकर्षण का केंद्र रही है। इसकी लोकपरंपराएं भी समृद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस मेले में महाराष्ट्र का छोटा स्वरूप देखने को मिल रहा है और मराठी व्यंजनों की महक पूरे परिसर में समाई हुई है।
रविवार तक चलने वाले इस फेस्टिवल में शहरवासियों को मराठी खानपान का स्वाद लेने के साथ ही महाराष्ट्र की लोककला, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।