धार्मिक झांकी निकालने की शुरुआत सर सेठ हुकुमचंद ने वर्ष 1924 में की थी। पहली झांकी बैलगाड़ी पर निकाली गई थी। तब से यह धार्मिक पर्व मिल श्रमिक बड़े धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। इंदौर की सभी कपड़ा मिलें बंद होने के बाद भी सभी मिलों की गणेश उत्सव समितियां जनसहयोग से यह धार्मिक त्योहार और 10 दिवसीय गणेश उत्सव मनाती आ रही हैं।
हुकुमचंद मिल गणेश उत्सव का यह 103वां वर्ष है। मिल चालू थी, तब सभी श्रमिक, कर्मचारी और अधिकारी अपना एक दिन का वेतन देते थे और गणेश महोत्सव पर्व मनाते थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंदौर की सभी कपड़ा मिलें बंद हो गईं, लेकिन परंपरा नहीं टूटी। जनसहयोग से धार्मिक झांकियों का निर्माण श्रमिक करते हैं। नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण और खजराना मंदिर के अलावा अन्य संस्थाओं की झांकियां भी इसमें हिस्सेदारी करती हैं।शुक्रवार को रात से सुबह तक दस घंटे झांकियां सड़कों पर रहेंगी।