इंदौर की तरफ आने वाले ट्रैफिक को आसान बनाने के लिए एमआर-11 सड़क का बनना बहुत जरूरी था। इंदौर विकास प्राधिकरण 60 मीटर चौड़ाई में इसे बना भी रहा है, लेकिन सड़क की लंबाई से समझौते किए जा रहे हैं। यह सड़क बायपास से एबी रोड को जोड़ती है और उससे आगे नई लोहामंडी के इलाके को जोड़ती है, लेकिन पूरी सड़क नहीं बन पा रही है।
फिलहाल इसे बायपास से देवास नाका बस्ती के मुहाने तक ही बनाया जा रहा है। उसके आगे सड़क कब बनेगी और एबी रोड तक जुड़ेगी या नहीं, इस बारे में कोई फैसला अब तक नहीं हुआ है। दो किलोमीटर सड़क के लिए पचास करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं, लेकिन जब तक इस सड़क की कनेक्टिविटी एबी रोड से नहीं होगी, तब तक ट्रैफिक का दबाव कम नहीं होने वाला। इसके लिए एमआर 11 को निरंजनपुर से जोड़ने के लिए एक लिंक रोड बनाने की तैयारी भी इंदौर विकास प्राधिकरण ने की है।
200 से ज्यादा निर्माण बाधक
देवास नाका बस्ती से एबी रोड के बीच 200 से ज्यादा निर्माण सड़क की चौड़ाई में बाधक बने हुए हैं। उन्हें हटाने के लिए नगर निगम को प्राधिकरण ने पत्र भी लिखा है, लेकिन अभी तक कब्जे नहीं हट पाए हैं। 800 मीटर सड़क में यह बाधक निर्माण है। इसमें कई बड़े गोदाम भी हैं। बायपास से बस्ती के पहले तक सड़क सालभर में बन जाएगी।
सड़क बनने से ये फायदे होंगे
-इस सड़क के बनने से एमआर-10 मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। अभी भारी वाहन दिल्ली, भोपाल, आगरा की तरफ जाने वाली बसें एमआर-10 मार्ग से होकर गुजरती हैं। जंक्शन पर ब्रिज बनने से अभी भारी वाहन भी जैसे तैसे निर्माणाधीन एमआर-11 से ही गुजर रहे हैं।
-एबी रोड से उज्जैन की तरफ जाने वाले वाहन भी एमआर-10, सुखलिया ग्राम, चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराहा के बीच से होकर गुजरते हैं। यह रहवासी क्षेत्र भी है। भारी वाहनों के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं और कई लोगों को अपनी जान गंवाना पड़ी है। एमआर-11 के बनने से भारी वाहनों के ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
-शहर को 60 मीटर चौड़ाई में एक नई सड़क की सौगात मिलेगी। शहर में सड़कों को चौड़ा तो किया जाता है, लेकिन नई सड़क बहुत कम बन पाती है।
शहर की एंट्री होगी आसान
इंदौर रियल्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (इरवा) के अध्यक्ष अरविंद गुप्ता का कहना है कि नई सड़कों के बनने से नई बसाहट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। एमआर-11 के आसपास कई नई टाउनशिपों का विकास हो चुका है। एमआर-11 के बनने से शहर की एंट्री आसान हो जाएगी, लेकिन इसे एबी रोड तक बनना चाहिए। अधूरी सड़क से कुछ फायदा नहीं होगा। रहवासी निरंजन वाड़े बताते हैं कि बायपास से शहरी हिस्से में जाने के लिए इंदौर में कम सड़कें है। एमआर-11 से 40 से ज्यादा कॉलोनियां व ग्रामीण क्षेत्र जुड़े हैं। भारी वाहनों शहरी हिस्से के ट्रैफिक को बाधित किए बगैर निकल सकेंगे।
200 निर्माण हटेंगे, तभी बन पाएगी पूरी सड़क
-एमआर-11 के निर्माण में पचास करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। इस मार्ग की लंबाई तीन किलोमीटर है और चौड़ाई 60 मीटर है। 200 निर्माण इस सड़क के निर्माण में बाधक है। सड़क बनना शुरू हो गई, लेकिन निर्माणों को तोड़ने पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। वर्ष 1975 के मास्टर प्लान में इस सड़क की प्लानिंग की गई थी, लेकिन सड़क अब बनाई जा रही है।
10 साल पहले सिंहस्थ मद से इस सड़क को बनाने की योजना तैयार की गई थी। बाद में उसे मद में एमआर-4 को बनाने का फैसला लिया गया। शहर की तरफ आने वाले ट्रैफिक के लिए चौड़े मार्ग जरूरी है, इसलिए प्राधिकरण एमआर 11 का निर्माण कर रहा है। -शंकर लालवानी, सांसद