रेडिमेड रावण बिक रहे इंदौर मे।
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बुराई के प्रतीक रावण का दहन दशहरे पर किया जाता है, लेकिन इंदौर में यही रावण कई परिवारों को रोजगार दे रहा है। शहर के पंचम की फेल क्षेत्र में दस साल पहले दो-तीन परिवारों ने रेडीमेड रावण बनाकर बेचने का फैसला लिया था। अब यहां रावणों की मंडी लगने लगी है।
शहरभर से लोग यहां रावण खरीदने आते हैं। कारीगर 10 से 20 फीट तक के रावण बनाकर आयोजन स्थल तक पहुंचाते हैं। 20 फीट से अधिक ऊंचाई वाले रावणों के ऑर्डर मिलने पर कारीगर आयोजन स्थल पर जाकर ही उनका निर्माण करते हैं। रावणों की कीमत दो हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक होती है। कारीगर केवल रावण का ढांचा तैयार करते हैं। उसमें घास और पटाखे लगाने की जिम्मेदारी आयोजकों की होती है।
पंचम की फेल में नवरात्रि शुरू होने से पहले ही रावण बनाने का काम शुरू हो जाता है। सबसे पहले बांस का ढांचा तैयार किया जाता है। दशहरे से पांच दिन पहले रावण की पोशाक और चेहरे बनाने का काम शुरू होता है। रावण बनाने वाले कलाकार मनोज जारवाल का कहना है कि इसमें सबसे ज्यादा परेशानी चेहरे बनाने में आती है। इसके लिए चित्रकारों की मदद ली जाती है।
दस मुंह वाले रावण के ऑर्डर सबसे ज्यादा आते हैं। कारीगर एक बड़ा चेहरा बनाकर देते हैं, जबकि बाकी चेहरे छोटे आकार के होते हैं। तीन साल पहले दशहरे पर बारिश के कारण कई रावण गीले हो गए थे। इसके बाद से वाटरप्रूफ रावणों की मांग भी बढ़ने लगी है।
कारीगरों का कहना है कि पहले आयोजक समितियों के कई सदस्य खुद भी रावण तैयार करते थे, लेकिन अब ज्यादातर आयोजक ऑर्डर देकर रावण बनवाते हैं। इसी वजह से रेडीमेड रावणों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।