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इंदौर : आईएएस कैलाश बने लेखक, बोले-साहित्य मानवीय संवेदनाओं को जानने का जरिया है

Tue, 08 Sep 2026 09:19 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

आईएएस अधिकारी और ऊर्जा विभाग के अपर सचिव कैलाश वानखेड़े साहित्य को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच को समझने का जरिया मानते हैं। अपनी चर्चित किताब अंधेरे उजाले के विमोचन के सिलसिले में इंदौर पहुंचे वानखेड़े ने कहा कि आम आदमी की व्यथा ही उनकी कथा है। 
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आईएएस कैलाश वानखेड़े - फोटो : amarujala
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विस्तार
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आईएएस व ऊर्जा विभाग में अपर सचिव कैलाश वानखेड़े अपनी चर्चित किताब ‘अंधेरे उजाले’ के विमोचन के सिलसिले में इंदौर आए। उन्होंने साहित्य को लेकर कई बातें साझा कीं। कैलाश ने कहा कि समाज में जो भी हम देखते हैं, महसूस करते हैं, उसका शब्दों में प्रकटीकरण करना चाहिए।

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मैंने इसके लिए लेखन को जरिया बनाया है। साहित्य के कारण मानवीय संवेदनाओं को गहराई से समझा जा सकता है। मेरी पुस्तक के किरदार वास्तविक नहीं हैं, लेकिन नौकरी के दौरान जो किरदार मिलते हैं, प्रभावित करते हैं। उनका प्रभाव मेरे साहित्य के किरदारों में भी दिखाई देता है। मेरी कहानियां समाज की उन समस्याओं को दिखाती हैं, जिन्हें अक्सर उपेक्षित समझा जाता है। आम आदमी की व्यथा ही मेरी कथा होती है।
 

प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ साहित्य के लिए समय देने के सवाल पर कैलाश कहते हैं कि साहित्य से लगाव बचपन से था। बाद में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया, तो लेखन के लिए समय नहीं मिलता था, लेकिन साहित्य से कभी दूर नहीं रहा।

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प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मैं लेखन के लिए भी समय निकाल लेता हूं। इसके लिए सुबह का समय मैं सबसे उचित मानता हूं। तब रचनात्मकता भी ज्यादा साथ देती है। शाम का वक्त दफ्तर और पारिवारिक जिम्मेदारी में निकल जाता है, लेकिन मेरी सुबह लेखन के लिए होती है।उन्होंने कहा कि अभी तक तीन किताबें लिखी हैं, यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

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