परीक्षा केंद्रों की बिजली गुल होने के कारण ठीक से परीक्षा नहीं दे पाए नीट के विद्यार्थियों की परीक्षा दोबारा कराने के मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई। दो घंटे तक बहस चली। इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया।
विद्यार्थियों की तरफ से वकील ने सुनवाई में कहा कि यदि दोबारा परीक्षा नहीं होती है तो छात्रों का भविष्य खराब हो जाएंगा। इंदौर- उज्जैन संभाग के 75 स्टूडेंट खराब मौसम के कारण गुल हुई बिजली से प्रभावित हुए। वे ठीक से पर्चा नहीं दे पाए थे।
इस मामले में कुछ स्टूडेंटों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट में नीट की तरफ से साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में एक समय पर परीक्षा हुई। जिसमें 20 लाख से ज्यादा अभ्यार्थी शामिल हुए।
जिन सेंटरों पर परीक्षा प्रभावित होने की बात की जा रही है। वहां भी पाॅवर बैकअप था। दूसरी तरफ अभ्यार्थियों के वकील ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था नही थी, जबकि नीट ने परीक्षा फीस के तौर पर 350 करोड़ रुपये लिए। व्यवस्था का भौतिक सत्यापन भी नहीं किया गया। उन्होंने नीट की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए।
रोते हुए निकले थे स्टूडेंट
4 मई को इंदौर और उज्जैन संभाग में तेज हवा के साथ शाम को बारिश हुई। उस दिन नीट की परीक्षा भी थी। बिजली गुल होने से परीक्षा हाॅल में अंधेरा हो गया। पेपर खराब होने की वजह से स्टूडेंट रोते हुए बाहर निकले थे। कुछ छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने प्रभावित छात्रों की री-एक्जाम कराने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ नीट की तरफ से वकील ने अपील की थी। इसके बाद फिर से एक्जाम करने के फैसले पर कोर्ट ने स्टे दिया था। इसे लेकर प्रभावित स्टूडेंटों ने फिर कोर्ट मे अपील की थी। जिस पर गुरुवार को अंतिम सुनवाई हुई।