बाग की गुफा के आसपास बनेगा नेशनल पार्क।
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इंदौर से डेढ़ सौ किलोमीटर दूरी पर स्थित बाग तहसील के चार गांवों में डायनासोर नेशनल पार्क बनाने की योजना पर सरकार काम कर रही है। इसके लिए हाल ही में संभागायुक्त दीपक सिंह ने एक बैठक भी ली थी। जिसमें इसकी योजना पर काम हुआ। इस पार्क में सियार, लोमड़ी जैसे वन्य जीव होंगे और शीशम, नीम, आंवला सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ होंगे। दरअसल मांडव और बाग के आसपास के गांवों में पहले डायनासोर के अंडे व उनकी हड्डियों के जीवशम मिल चुके है। एक छोटा डायनासोर पार्क मांडू के समीप भी बनाया गया है।
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बाग तहसील में पार्क बनाने की मंशा इसलिए भी है,क्योकि सालभर में 15 हजार से ज्यादा पर्यटक बाग की गुफाएं देखने आते है। इस पार्क के समीप बड़केश्वर मंदिर, हनुमान मंदिर भी है। इसके अलावा पर्यटक आदिवासी लोक कला व उनकी संस्कृति से भी रुबरु हो सकेंगे। अफसरों को उम्मीद है कि पार्क के विकसित होने के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और आदिवासी परिवारों को रोजगार भी मिलेगा। बाग का बाग प्रिंट पूरे देश में मशहूर है।
इस पार्क के चारों तरफ बोरकुरी, रिसावाला, बयादीपुरा (पाडलिया) और गंगकुई (जामनियापुरा) ग्राम हैं। यह नेशनल पार्क भी अन्य नेशनल पार्कों की तरह इको सेंसेटिव झोन के अंतर्गत रहेगा। यह क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से भी संरक्षित क्षेत्र है। प्रस्तावित नेशनल पार्क की दूरी मेघनगर रेल्वे स्टेशन से 95 किलो मीटर होगी, वहीं इंदौर रेल्वे स्टेशन से इसकी दूरी 152 किलो मीटर होगी। नेशनल पार्क में शीशम, नीम, आंवला सहित हजारों प्रजातियों के आयुर्वेदिक एवं औषधीय पेड़ होंगे, वहीं सियार, लोमड़ी जैसे वन्य जीव भी होंगे।
पर्यटकों की दृष्टि से भी यह पार्क सबको लुभाएगा। इस क्षेत्र में घूमने का सबसे श्रेष्ठ समय अक्टूबर से लेकर दिसम्बर तक का होता है। उस समय तीन-चार गुना अधिक पर्यटक आतें हैं। वीकेंड पर भी संख्या बढ़ जाती है।
संभागायुक्त श्री सिंह ने बताया कि डायनोसोर नेशनल पार्क को बनाते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जायेगा कि जनजातीय समाज के अधिकारों का हनन नहीं हो। क्योंकि इस क्षेत्र में जनजातीय समाज बहुसंख्यक में है। इसलिये उनकी परम्परा, त्यौहार, उत्सव आदि का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पार्क के समीप ऐसी गतिविधियां चलाई जायेगी जिससे प्रकृति को भी नुकसान नहीं पहुंचे और जनजातीय समाज को भी रोजगार मिल सके।