वन विभाग के अफसर नेे लगाई फांसी।
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इंदौर के वन विभाग के डीएफओ महेंद्र सिंह सोलंकी की आत्महत्या की गुत्थी अभी सुलझ नहीं पाई है। उनके कमरे से पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पहले अफसरों को पारिवारिक विवाद की वजह लगी थी, लेकिन परिजनों ने पुलिस को बताया कि किसी तरह का पारिवारिक विवाद कभी भी नहीं रहा। सोलंकी परिवार का काफी ध्यान रखते थे। पुलिस अब ब्लैकमेलिंग के एंगल से भी जांच कर रही है।
सोलंकी के खिलाफ विभाग स्तर पर कोई बड़ी जांच नहीं चल रही थी, लेकिन उन्होंने विभाग के कई कर्मचारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे रखे थे। कुछ आरटीआई कार्यकर्ता भी सोलंकी के कार्यकाल में हुए कामों को लेकर सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज मांगते रहते थे, हालांकि सोलंकी के कार्यकाल में कोई बड़ी अनियमितता भी सामने नहीं आई।
पुलिस ने उसका मोबाइल जांच में लिया है, लेकिन उसमें भी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। शंकर नामक व्यक्ति लगातार उन्हें वाट्सएप काॅल लगा रहा था। अब पुलिस उससे भी पूछताछ करेगी।
खरगोन में अंत्येष्टि
आपको बता दें कि इंदौर के वनमंडलाधिकारी महेंद्र सिंह सोलंकी ने शुक्रवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। तब घर पर पत्नी और बच्चे नहीं थे। वे पूजा के लिए खरगोन गए हुए थे। नौकर ने उन्हें फांसी पर लटके हुए देखा और पुलिस को सूचना दी। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने उनका शव परिजनों को सौंप दिया। सोलंकी मूलत: खरगोन के थे। उनकी अंत्येष्टि भी खरगोन में उनके पैतृक गांव में की गई।