इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन ठगी के एक बड़े मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस प्रकरण में अब तक कुल 16 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। यह ठगी 59 वर्षीय महिला फरियादिया के साथ की गई थी, जिसमें 1 करोड़ 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ। आरोपी गैंग ने स्काइप और व्हाट्सएप वीडियो कॉल का उपयोग कर फरियादी को विभिन्न शासकीय विभागों (CBI, RBI, पुलिस आदि) के अधिकारी बताकर डराया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल जाने का भय दिखाते हुए उनकी निजी और बैंकिंग जानकारी प्राप्त की।
450 से अधिक सिमकार्ड से किए अपराध
आरोपी गौरव तिवारी, योगेश पटले और सुजल सूर्यवंशी ने ग्रामीण क्षेत्रों से 450 से अधिक सिमकार्ड इश्यू करवाए और ठग गैंग को उपलब्ध कराए। सिमकार्ड के लिए ग्राहकों की ई-केवाईसी और डी-केवाईसी की प्रक्रिया का गलत उपयोग किया गया, जिससे ग्राहकों को पता भी नहीं चला कि उनके नाम से दूसरा सिम कार्ड भी चल रहा है। इन सिमकार्ड का उपयोग वीडियो कॉल और व्हाट्सएप ओटीपी के लिए किया गया।
देश के बाहर भी सिमकार्ड भेजते थे
गौरव तिवारी ने बताया कि उसने 2024 में एयरटेल पीओएस एजेंट के रूप में काम शुरू किया और पैसों के लालच में आकर ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाकर सिम कार्ड इश्यू करने का काम शुरू किया। उसके दोस्त योगेश पटले ने उसे सिमकार्ड गैंग के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया। योगेश पटले ने भी बताया कि उसने पहले आईडिया कंपनी में प्रमोटर के रूप में काम किया था और सिमकार्ड गैंग के सदस्यों के साथ संपर्क बनाया। सुजल सूर्यवंशी ने कबूला कि वह लाओस स्थित ठग गैंग के साथ काम करता था और देश के बाहर भी सिमकार्ड भेजता था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि यह गैंग देश के विभिन्न राज्यों के अलावा लाओस जैसे देशों में भी ठगी में सक्रिय है। आरोपियों ने सैकड़ों सिमकार्ड इश्यू कर गैंग को उपलब्ध कराए और इसके बदले में लाखों रुपये कमाए। आरोपी ठग गैंग के सदस्यों के रूप में कार्य करते थे और इनके खिलाफ विस्तृत जांच जारी है। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा इस मामले में सख्त कार्रवाई के लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया है। पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जिससे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।