इंदौर के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ कॉन्स्टेबल फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त की जांच जारी है। इंदौर, देवास में कई जगह उसके द्वारा किए गए जमीनों के सौदों की जानकारी मिली है।
पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ कॉन्स्टेबल फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और जैसे जैसे जांच की सुई आगे बढ़ रही है वैसे वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार देवास में दो प्लॉट खरीदने के लिए कॉन्स्टेबल की पत्नी, मां और बेटी ने ऑनलाइन बोली में हिस्सा लिया था और इन दोनों प्लॉट की बोली 92 लाख रुपए में तय हुई थी, तथा रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक खर्चों को मिला दिया जाए तो इनकी कुल लागत करीब एक करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इसके अलावा उज्जैन रोड पर करीब 45 बीघा जमीन का 9 करोड़ रुपए में एक बड़ा सौदा होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसमें फिरोज खान की भूमिका एक गवाह के रूप में दर्ज की गई है।
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परिवार के सदस्यों के नाम पर देवास में खरीदे गए महंगे प्लॉट
लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार एक कंपनी ने पिछले साल अगस्त महीने में देवास की दो संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया पूरी की थी। इनमें उज्जैन रोड पर 2400 वर्गफीट का प्लॉट नंबर 38 डी और कॉन्वेंट स्कूल मार्ग पर 750 वर्गफीट का प्लॉट नंबर 39 शामिल था, और इनमें से एक प्लॉट पर पक्का मकान भी बना हुआ है। इस नीलामी प्रक्रिया में फिरोज खान की पत्नी हिना खान, उनकी मां वहीदा खान और उनकी बेटी जैफी खान ने ऑनलाइन माध्यम से बोली लगाई थी। ये दोनों प्लॉट 92 लाख रुपए में खरीदे गए थे जिसके बाद फिरोज खान ने खुद पैसे जमा कराए और इनकी आधिकारिक रजिस्ट्री कराई। इन दोनों संपत्तियों को खरीदने में रजिस्ट्री शुल्क और अन्य सभी खर्चों को मिलाकर कुल लागत करीब एक करोड़ रुपए आई है। इस पूरी खरीद से जुड़े सभी दस्तावेजों और रजिस्ट्री की प्रामाणिक जानकारी जुटाने के लिए लोकायुक्त ने देवास के रजिस्ट्रार कार्यालय से आधिकारिक ब्योरा मांग लिया है।
उज्जैन में 9 करोड़ रुपए के जमीन सौदे में गवाह बने फिरोज खान
लोकायुक्त की छानबीन के दौरान उज्जैन रोड पर स्थित करीब 45 बीघा जमीन का एक बड़ा सौदा भी प्रकाश में आया है। यह जमीन कस्तूरीबाई और इंदौर के रहने वाले रविकांत पंवार ने श्याम इन्फा के पार्टनर सुमित जिंदल को 9 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि में बेची थी। खास बात यह है कि इस बड़े वित्तीय सौदे में कॉन्स्टेबल फिरोज खान को एक गवाह के रूप में शामिल किया गया था। फिलहाल राजस्व न्यायालय ने इस जमीन के नामांतरण या म्यूटेशन की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब लोकायुक्त इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि इस 9 करोड़ रुपए के जमीन सौदे में फिरोज खान की वास्तविक भूमिका क्या थी और वह आखिर किस हैसियत से इस प्रक्रिया का हिस्सा बने थे। हालांकि मामले की जांच अभी भी जारी है और उनकी भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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संपत्तियों के स्रोत और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की हो रही है गहन पड़ताल
बीते महीने 14 अक्टूबर को लोकायुक्त की विशेष टीम ने कॉन्स्टेबल फिरोज खान के विभिन्न घरों और अन्य ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही जांच एजेंसी उनकी तमाम संपत्तियों, परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी गई प्रॉपर्टी और बड़े वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की एक एक परत खंगाल रही है। देवास के दोनों प्लॉट की महंगी खरीद और उज्जैन के नौ करोड़ रुपए के जमीन सौदे से जुड़े तमाम तथ्य इस वक्त लोकायुक्त की जांच के सबसे अहम बिंदु बने हुए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में संपत्तियां खरीदने के लिए आखिरकार धन कहां से आया और इन सभी सौदों में फिरोज खान की संलिप्तता किस स्तर की थी।