सिविल जज परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान पाने वाली इंदौर निवासी भामिनी राठी ने सोचा नहीं था कि वह प्रदेश में इस परीक्षा में टाॅप करेगी। यह उनका पहला प्रयास था और उसमें ही उन्होंने प्रदेश में पहला स्थान पा लिया। रायपुर में सिविल जज के रुप में सेवाएं दे रही भामिनी का कहना है कि मैने कानून के प्रावधानों को रटने के बजाए समझा। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के चर्चित फैसलों का गहराई से अध्ययन किया। इससे बहुत मदद मिली।
भामिनी ने बताया कि ताऊजी बीडी राठी हाईकोर्ट जज थे। वे ही मेरी प्रेरणा बने। परिवार के तीन सदस्य विधि क्षेत्र से जुड़े थे, इस कारण पहले से ही तय कर लिया था कि सिविल जज बनना है। इस सफलता के लिए मेरे माता-पिता, परिजन व दोस्तों ने हमेशा मुझे मेहनत करने की प्रेरणा दी।
मेरी मां मुझसे हमेशा कहती थी कि तुम परिवार का नाम रोशन करोगी। माता-पिता के चेहरे पर सच्ची खुशी देखकर अच्छा लगता है। मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ में भी सिविल जज परीक्षा दी थी। वहां मेरा सिलेक्शन हो चुका था, लेकिन यह भी विश्वास था कि मुझे मेरे गृह राज्य में जाना है। आखिरकार वही हुआ, लेकिन यह पता नहीं था कि परीक्षा में पहला स्थान आ जाएगा।
रिवीजन सबसे महत्वपूर्ण
भामिनी ने बताया कि क्लास में जो पढ़ाया जाता था, उसका मैं रिवीजन करती थी। परीक्षा की तैयारी में बेयर एक्ट्स और उनकी व्याख्या पर मैने ज्यादा फोकस किया। माॅक टेस्ट और पुराने प्रश्न पत्र हल किए। समय प्रबंधन का भी ध्यान रखा। यह बातें मेरे लिए मददगार साबित हुई।