इंदौर में साठवां ग्रीन काॅरिडोर बना।
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सोमवार को इंदौर में 60 वां ग्रीन कॉरिडोर बना। दो हाथ और लीवर 12 मिनिट में शैल्बी अस्पताल से एयरपोर्ट पहुंचे। दूसरा ग्रीन काॅरिडोर शैल्बी अस्पताल से चोइथराम अस्पताल तक के लिए बना। यहां किडनी और स्किन भेजी गई। एक अंगदान के कारण चार लोगों को नई जिंदगी मिली।
इंदौर निवासी सुरेंद्र पोरवाल शैल्बी अस्पताल में भर्ती थे। उनकी ब्रेन डेथ हो गई थी। परिजनों ने अंगदान की इच्छा जताई। इसके बाद मुस्कान ग्रुप के सेवादार जीतू बगानी और संदीपन आर्य ने परिजनों से संपर्क किया और अंगदान प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई। तय नियमों के तहत ब्रेन डेथ की घोषणा की गई। इसके बाद अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई। सोमवार शाम 6.25 मिनट पर ग्रीन काॅरिडोर बनाया गया। 12 मिनट में विशेष बॉक्स में एंबुलेंस से दोनों हाथ और लीवर को मुंबई के एक अस्पताल में भेजा गया। एयरपोर्ट पर पहले से चार्टर प्लेन और डॉक्टरों की टीम तैयार बैठी थी। इसी रात को आपरेशन कर अंग प्रत्यारोपण किया जाएगा। किडनी के लिए इंदौर में ही ग्रीन काॅरिडोर बने। वहां भी 10 मिनट के भीतर अंग पहुंच गए।
नम आंखों से परिजनों ने दी विदाई
पोरवाल के अंगों को शैल्बी अस्पताल में नम आंखों से परिजनों ने विदाई दी। ट्रैफिक पुलिस ने तय रुट पर ग्रीन काॅरिडोर बनाकर ट्रैफिक रुकवाया और अंगों को रवाना किया। शाम के समय मार्गों पर यातायात का दबाव रहता है, लेकिन वाहन चालकों ने भी राह दी। आपको बता दें कि इंदौर में अब तक 60 बार ग्रीन काॅरिडोर बन चुके है। देश में अंगदान में भी इंदौर पहले स्थान पर है। इतने ग्रीन काॅरिडोर अन्य किसी शहर में नहीं बने।