भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मालवा निमाड़ की आठ सीटों में से तीन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला रोचक है। कांग्रेस उम्मीदवार के मैदान छोड़ने के बाद इंदौर मेें भाजपा लीड बढ़ाने पर फोकस कर रही है। देवास, मंदसौर, खंडवा और उज्जैन सीट पर भाजपा को कोई चुनौती नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस ने चुनाव में आदिवासी बाहुुल्य लोकसभा सीट झाबुआ, खरगोन और धार पर ज्यादा फोकस किया है। इन सीटों पर ही कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इन सीटों पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सभाएं की।
एंटीइंकमबैंसी फेक्टर से कांग्रेस को उम्मीद
धार-खरगोन सीट पर दो मर्तबा से भाजपा का कब्जा हैै,जबकि झाबुआ लोकसभा सीट पर पिछला लोकसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार गुमान सिंह डामोर जीते थे। भाजपा ने धार और झाबुआ सीट पर सांसदों का टिकट काट दिया था। कांग्रेस को लग रहा है कि लगातार भाजपा की जीत के कारण भाजपा यहां एंटीइंकमबैंसी फेक्टर का सामना कर रही है, जो कांग्रेस के लिए फायदेमंद है,जबकि भाजपा को तीनों सीटों पर परंपरागत वोटबैंक और मोदी फेक्टर पर भरोसा है।
झाबुआ में तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी झाबुआ लोकसभा सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता कांतिलाल भूरिया और वन मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनिता चौहान आमने सामने है। इस सीट पर तीन मंत्री नागर सिंह चौहान, निर्मला भूरिया और चैतन्य कश्यप की प्रतिष्ठा दांव पर है। झाबुआ और आलीराजपुर से कांग्रेस को मदद की उम्मीद है तो रतलाम शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के परंपरागत वोटबैंक पर भाजपा को भरोसा है। आठों विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा झाबुआ लोकसभा सीट की ही हो रही है।