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Indore: पुणे निवासी 58 वर्षीय ज्योति भक्त ने साइकिल से अकेले कर ली तीन हजार किमी लंबी नर्मदा परिक्रमा

Fri, 07 Mar 2025 04:27 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

ज्योति करती है कि मेरी उम्र 58 साल है। अब जिंदगी की दूसरी पारी है। परिवार, बच्चों को पूरा समय दिया और एक पत्नी, बेटी , बहु और माँ की जिम्मेदारी बखूबी निभाई लेकिन अब दूसरी पारी में अब खुद के शौक पूरे करने है।
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ज्योति ने अकेलेे की नर्मदा परिक्रमा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यदि खुद पर भरोसा होता है तो फिर मन की करने में कोई मुश्किलें नहीं आतीं। पुणे निवासी 58 वर्षीय ज्योति भक्त ने तीन हजार किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा करने का फैसला लिया। रिश्तेदारों, दोस्तों ने मना किया कि अकेली महिला हो, क्यों रिस्क ले रही हो, कुछ हो जाएगा तो...लेकिन ज्योति ने किंतु, परंतु की चिंता को खूंटी पर टांगा और निकल पड़ी साइकिल लेकर।

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ज्योति भक्त ने तीन हजार किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा साइकिल से 34 दिनों में पूरी की। हर दिन वह 50 से 70 किलोमीटर साइकिल चलाती थी। समतल सड़क, पगडंडी, पहाड़, कंटीले रास्तों के बीच से होती उसकी साइकिल नर्मदा की धाराएं देखकर आगे बढ़ती चली गई।

पांच बार साइकिल पंचर हुए, खुद ने दुरुस्त किए
ज्योति कहती हैं कि पहले मुझे भी लग रहा था कि अकेली महिला के लिए यात्रा करना ठीक होगा क्या, फिर मुझे नर्मदा परिक्रमा रूट के रहवासियों के फोन नंबर मिले। मैंने उनसे अपनी शंकाएं पूछीं तो जवाब मिला कि आप नर्मदा परिक्रमा करने आएंगी तो फिर ग्रामीण आपका सम्मान नर्मदा मैय्या के रूप में ही करते हैं। आप किसी बात की चिंता मत करिए।
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विदेश में रह रहे बेटे ने बढ़ाया उत्साह
पति और विदेश में रह रहे बेटे ने भी नर्मदा परिक्रमा के लिए ज्योति का उत्साह बढ़ाया। ज्योति बताती है कि मैंने यात्रा से पहले पंचर बनाना सीखा। पूरी यात्रा के दौरान पांच बार साइकिल पंचर हुई। उसे मैंने ही जोड़ा। नर्मदा परिक्रमा के दौरान हर समय मुझे लगा कि नर्मदा मैय्या मेरे साथ चल रही हैं। शिवरात्रि पर मेरी परिक्रमा पूरी हुई।

जिंदगी की दूसरी पारी में खुद को समय दो
ज्योति कहती हैं कि मेरी उम्र 58 साल है। अब जिंदगी की दूसरी पारी है। परिवार, बच्चों को पूरा समय दिया और एक पत्नी, बेटी, बहू और मां की जिम्मेदारी बखूबी निभाई, लेकिन अब दूसरी पारी में अब खुद के शौक पूरे करने हैं। अब मैं इसके बारे में सोचती नहीं हूं, कर के ही दम लेती हूं। मैं पेंटिंग बनाती हूं, पहाड़ों पर घूमने जाती हूं। इंसान को अपने लिए वक्त निकालना चाहिए। खुद के लिए भी थोड़ा जीना चाहिए। मैं वहीं करती हूं और खुश रहने लगी हूं।
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