चार फीट है प्रतिमा की लंबाई
वाग्देवी की प्रतिमा की लंबाई चार फीट और वजन 250 किलो है। परमार काल में राजा भोजदेव परमार ने तब देश के शिल्पकार मंथाल से इस प्रतिमा का निर्माण कराया था। यह प्रतिमा संगमरमर की है और प्रतिमा पर इसका निर्माण वर्ष 1034 भी अंकित है। इस प्रतिमा में वाग्देवी के अलावा अन्य आकृतियां भी हैं। प्रतिमा के निचले भाग में भगवान गणेश और सिंह पर विराजमान मां दुर्गा की आकृति है।
1962 में पता चला लंदन संग्रहालय में रखी है प्रतिमा
इतिहासकार स्व. विष्णु श्रीधर वाकणकर 1962 में खुद लंदन गए थे और उन्होंने प्रमाणित किया था कि संग्रहालय में रखी गई मूर्ति भोजशाला की वाग्देवी की है। तब से ही प्रतिमा को लंदन से लाने की मांग जोर पकड़ती रही। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी इसके लिए उच्च स्तर पर प्रयास किए थे। वर्ष 2017 में भी इसके लिए प्रयास हुए थे।
पांच साल पहले प्रतिमा वापस लाने पर सहमति बनी थी : ठाकुर
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने अमर उजाला से कहा कि लंदन के संग्रहालय से जल्दी ही प्रतिमा लाई जाएगी। पांच साल पहले ही इस पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन तब यह शर्त रखी गई थी कि प्रतिमा को भोजशाला में ही रखा जाए, लेकिन इसका मामला कोर्ट में था। अब हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर मान लिया है। इस मामले में जल्दी ही एएसआई एक रिपोर्ट सरकार को देगी। प्रदेश सरकार भी इस मामले में जल्द ही पत्र व्यवहार करने जा रही है। प्रतिमा जल्दी ही धार आएगी।
कोहिनूर हीरा और तलवार भी हैं लंदन में
आजादी के बाद विदेशों से 1200 से ज्यादा वस्तुएं फिर भारत आ चुकी हैं, लेकिन देश से चोरी हुआ कोहिनूर हीरा, महाराजा रणजीत सिंह का स्वर्ण सिंहासन, टीपू सुल्तान की तलवार और मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन के संग्रहालयों में हैं। कुछ जैन प्रतिमाएं भी भारत सरकार वापस ला चुकी है। अब वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार जी-20 जैसे मंच या सांस्कृतिक कूटनीति का सहारा ले सकती है।