इंदौर में इस तरह होती है फुटपाथ की सफाई।
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स्वच्छता की प्रीमियर लीग में भी इंदौर शीर्ष पर रहा। इंदौर के सबसे ज्यादा नंबर घर-घर कचरा संग्रहण के बाद होने वाले सोर्स सेग्रीगेशन की श्रेणी में 98 प्रतिशत अंक मिले, जबकि अहमदाबाद शहर इंदौर से चार अंक पीछे रहा। उसे 94 प्रतिशत अंक मिले। सूरत को 92 प्रतिशत अंक मिले। सुपर स्वच्छता लीग में दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी इंदौर पहले नंबर पर रहा।
पिछले साल सूरत सोर्स सेग्रीगेशन कैटेगरी में इंदौर के बराबर अंक लाया था, इस बार पिछड़ गया। शहरी विकास मंत्रालय ने सिटी रिपोर्ट कार्ड में इस श्रेणी के अंक ही जारी किए। अन्य अंकों में भी इंदौर शीर्ष पर रहा। इंदौर को सभी श्रेणी में 99.75 अंक मिले, जबकि सूरत को 99 प्रतिशत अंक मिलेे।
सभी शहरों को 12500 अंकों में से नंबर दिए गए। प्रीमियर लीग से बाहर के शहरों की रैंकिंग इसी आधार पर रही, लेकिन रैंकिंग में पहला स्थान पाने वाला अहमदाबाद शहर भी डोर टू डोर कचरा संग्रहण में इंदौर से पीछे ही रहा।स्वच्छता लीग में इंदौर के बाद सूरत और फिर नवी मुबंई रहा। टाॅप फाइव में विजयवाड़ा और नोएडा ने भी जगह बनाई। रैंकिंग में अहमदाबाद को 12500 में से 12079 अंक मिले,जबकि दूसरे नंबर पर रहे भोपाल को 12067 अंक मिले।
सफाई में इसलिए आगे इंदौर
- इंदौर में गीले कचरे से खाद बनाने का एशिया का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट बना है। इससे 100 से ज्यादा बसों का संचालन होता है।
- कपड़े, कांच, ई-वेस्ट और घरेलू कचरे को रिसाइकल कर उसे उपयोगी बनाने का काम इंदौर में तेजी से हुआ।
- बेकार व अटाला वस्तुएं सजावट के काम में लाई गई। मूर्तियां और म्यूरल बनाए गए। इंदौर में थ्री आर उद्यान बने।
- इंदौर में रोज सुबह कचरा वाहनों पर स्वच्छता एंथम बजाया जाता है। प्रेरणादायक गीतों से शहरवासियों की भागीदारी बढ़ाई।
- इंदौर में जीरो वेस्ट इवेंट और जीरो वेस्ट शादियां होती हैं।
- ऑन-डिमांड वेस्ट पिकअप वाहनों की शुरुआत, एप के माध्यम से शहरवासियों को कचरा उठवाने की सुविधा है।
- प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक कचरा वाहनों का संचालन, डीजल वाहन बंद किए गए।
- इंदौर डस्टबीन फ्री सिटी सात वर्षों से है, कहीं भी कूडा नजर नहीं आता है।
अब आगे क्या करेगा इंदौर
- इंदौर में अब पुराने कपड़ों से धागे बनाए जाएंगे। रोजाना 25 टन कपड़ों के वेस्ट से कमाई की जाएगी। इसके लिए प्लांट लगाया जाएगा।
- प्लास्टिक के कचरे को ईधन तेल में बदला जाएगा। इसके अलावा पुराने तेल को भी रिसाइकल किया जाएगा।
- डोर टू डोर कचरा संग्रहण का समय और कम किया जाएगा। कम समय में ज्यादा कचरा उठेगा। कचरा पिकअप स्टेशनों की संख्या बढेगी।