5 अगस्त को होगी निर्णायक सुनवाई
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धार स्थित भोजशाला-सरस्वती मंदिर विवाद मामले में अब सुप्रीम कोर्ट पांच अगस्त को अंतिम सुनवाई करेगा। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार को यह भी बताना होगा कि मुस्लिम पक्ष के लिए जुमे की नमाज का कौन सा वैकल्पिक स्थान तय किया गया है। फिलहाल कोर्ट ने भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति नहीं दी है, जबकि हिंदू पक्ष की नियमित पूजा पहले की तरह जारी रखने का निर्देश दिया है।
14 जुलाई के आदेश में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को जारी अपने आदेश में मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि मुस्लिम पक्ष के लिए हर शुक्रवार जुमे की नमाज अदा करने हेतु दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच भोजशाला के पास ही एक उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि भोजशाला परिसर के भीतर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हिंदू पक्ष की पूजा पर कोई रोक नहीं
अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष की पूजा-अर्चना पर किसी तरह की रोक नहीं रहेगी। सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी (सरस्वती) की नियमित पूजा पहले की तरह जारी रहेगी।
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एएसआई को भी दिए गए निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) न्यायालय की अनुमति के बिना भोजशाला-सरस्वती मंदिर के मूल ढांचे में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। साथ ही अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया।
धार प्रशासन वैकल्पिक स्थान की तलाश में
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद धार जिला प्रशासन मुस्लिम पक्ष की जुमे की नमाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान तलाशने में जुट गया है। अब 5 अगस्त को होने वाली अंतिम सुनवाई में प्रशासन को अदालत के सामने यह जानकारी रखनी होगी कि नमाज के लिए कौन सा स्थान तय किया गया है। साथ ही अदालत मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी अंतिम सुनवाई करेगी।