इंदौर के होलकर स्टेडियम में यह पहला मौका है जब भारतीय टीम इंदौर में टेस्ट मैच हारी है। इसके लिए पिच को जिम्मेदार माना जा रहा है। आईसीसी ने भी इंदौर के पिच को खराब माना और तीन डिमेरिट अंक भी दे डाले। दरअसल जल्दबाजी में पिच बदलने और नया पिच तैयार कराने का फैसला भारी पड़ गया।
होलकर स्टेडियम को मैच मिलते की जानकारी मिलने के बाद मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने पिच तैयार कराना शुरू कर दिया था, जो पीली मिट्टी का बना था, लेकिन मैच शुरू होने के तीन दिन पहले 25 फरवरी को बीसीसीआई की सिनियर पिच क्यूरेटर आशीष भौमिक और तापूस चटर्जी इंदौर आ गए थे।उनकी निगरानी में काली मिट्टी का पिच तैयार किया गया और उसी पिच पर टेस्ट मैच खेला गया। यह फैसला किसका था और किसके कहने पर पिच बदला गया। इसकी जिम्मेदारी कोई लेना नहीं चाहता है।
टीम प्रबंधन चाहता था कि काली मिट्टी के पिच पर मैच खेला जाए। मैच शुरू होने के तीन दिन पहले काली मिट्टी का पिच बनाना गया। एक मार्च को उसी पिच पर भारतीय बल्लेबाज बल्लेबाजी करने उतरे और आधी टीम एक घंटे के भीतर पाॅवेलियन लौट गई थी। उस पिच पर दो दिन में 30 विकेट गिरे।
बीसीसीआई के निर्देश मेें तैयार पिच
मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर ने अमर उजाला को बताया कि अंतरराष्ट्रीय मैचों में बीसीसीआई के निर्देश और निगरानी में ही पिच तैयार होता है। इसमें एमपीसीए के पिच क्यूरेटर सिर्फ मदद करते है।
दूसरे पिच पर हुआ मैैच
बीसीसीआई के पूर्व सचिव संजय जगदाले ने अमर उजाला को बताया कि होलकर स्टेडियम में पिली मिट्टी का पिच बना था। मैच शुरू होने के पहले भारतीय टीम प्रबंध से जुड़े पदाधिकारी, बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर आ गए थे। उनकी देखरेख में ही काली मिट्टी का पिच तैयार हुआ था। मैच भी उसी पर खेेेला गया है।