बागेश्वर धाम सरकार, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री
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इंदौर असाधारण जगह है। यहां पर एक तरफ नर्मदा बहती है तो दूसरी तरफ शिप्रा का जल मिलता है। एक तरफ उज्जैन महाकाल है तो दूसरी तरफ ओंकारेश्वर स्थित है। यहां की माता अहिल्या ने दुनियाभर के मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया और धर्म की रक्षा की। इसलिए यहां का हर नागरिक भी बेहद खास है। यह बातें बागेश्वर धाम बालाजी सरकार Bageshwar Dham sarkar पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री pandit dhirendra krishn shastri ने इंदौर में कही। वे यहां पर सात दिवसीय भागवत गीता के आयोजन में बोल रहे थे। श्रीमद् भागवत कथा प्रतिदिन चार मई तक शाम चार से सात बजे तक मां कनकेश्वरी गरबा परिसर आईटीआई रोड परिसर पर हो रही है। कथा की शुरुआत कलश यात्रा के साथ हुई। इसमें हजारों मातृशक्तियां सिर पर कलश लेकर निकली। राधे राधे के जयकारों से पूरा यात्रा मार्ग गुंजायमान हुआ। आस्था का कारबां जहां से भी गुजरा हर कोई इसमें रम गया। कलश यात्रा में साधु- संत शामिल हुए। शाम को कथा में ध्वज पथक के कलाकारों ने ढोल नगाड़े बजाए। इसके पूर्व बागेश्वरधाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सान्निध्य में मुख्य यजमान अक्षत रामचंद्र चौधरी ने व्यासपीठ पर वेद मंत्रों के बीच पूजन करके श्रीमद् भागवत को विराजित किया। व्यासपीठ का पूजन विधायक रमेश मेंदोला, सूरज रजक, नवीन गोधा, दीपक गुप्ता, नितेंद्र चौबे, नितिन रोचलानी ने किया।
जिनको भगवान चुनते हैं वहीं भागवत सुनने के लिए आते हैं
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जहां भक्त की हां होती है वहीं पर भगवान होते हैं। भगवान को खोजने की आवश्यकता नहीं होती है, भगवान सर्वत्र हैं। भगवान को पाने के लिए मन की शुद्धि बहुत जरूरी है। श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण सौभाग्य से मिलता है। भगवान की लीलाओं का दिव्य दर्शन कथा के माध्यम से होता है। भवसागर से पार जाने के लिए श्रीमद् भागवत का श्रवण जीवन का अमूल्य क्षण है। जनता जिनको चुनती है वह चुनाव जीतते हैं और लोकसभा-विधानसभा में पहुंचते हैं, लेकिन भगवान जिनको चुनते हैं और श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने चले आते हैं।
कई जिलों से आए लोग
रामरतन चौधरी व भगवती देवी चौधरी की पावन स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सुनने के लिए इंदौर के आसपास के जिलों से भी लोग यहां पर आए हैं। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने भक्तों के लिए निःशुल्क पार्किंग, आने जाने के लिए निःशुल्क ईरिक्शा, जलपान की व्यवस्था की है।