बावड़ी में लगी जाली सड़कर हो चुकी थी खराब।
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20 साल पहले बेलेश्वर मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों की नासमझी 36 लोगों के जीवन पर भारी पड़ी। बावड़ी को ढकने के लिए न तो किसी तकनीकी विशेषज्ञ की मदद ली और न ही कभी मरम्मत के बारे में सोचा। यह लापरवाही गुरुवार को बड़े हादसे की वजह बनी। नक्शे के विपरित गलत निर्माण होने पर बुलडोजर से तोड़ने की धमकियां देने वाले नगर निगम के अफसर भी इस गलत निर्माण पर आंख मूंदे रहे।
यह बावड़ी नगर निगम की सूची में भी शामिल नहीं थी और शहर के खतरनाक भवनों की जो सूची तैयार होती है, उसमे भी इस मंदिर को शामिल नहीं किया गया था, जबकि अफसरों को पता था कि बावड़ी के उपर मंदिर का निर्माण हुआ है। मंदिर प्रबंधन ने नोटिस के जवाब में खुद ही बावड़ी पर निर्माण होने का हवाला निगम को दिया था।
बगैर बीम कालम के छत और उस पर अनावश्यक बोझ
स्ट्रक्चरल इंजीनियर अतुल शेठ का कहना है कि जिस बावड़ी के उपर 20 साल पहले कोटा स्टोन बिछाकर तीन-चार इंच क्रांक्रिट भर दिया गया, उसमें बड़ी खामियां थी। छत को बगैर बीम काॅलम के बिछाया गया।
गहरी बावड़ी होने के कारण छत भरने से सेंटिंग नहीं लगाई,बलि्क कोटा पत्थर सरियों पर रखकर अनावश्यक बोझ बढ़ा दिया गया। नीचे के सरिए खुले थे। सालों तक कुएं में बन रही विभिन्न गैसों के संपर्क में आकर वे पूरी तरह सड़ चुके थे।10 एमएम का सरिया जंग की वजह से सड़कर 5 एमएम का हो चुका था, लेकिन उसके बारे में किसी ने नहीं सोचा। बस यही सबसे बड़ी चूक हादसे की सबसे बड़ी वजह रही।