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Dhar News: 1425 करोड़ की नर्मदा माइक्रो सिंचाई योजना अधूरी, दो साल बाद भी 66 गांवों को पानी का इंतजार

Thu, 29 Jan 2026 02:51 PM IST
धार ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार

सार

धार जिले की सरदारपुर तहसील में 1425 करोड़ की नर्मदा माइक्रो सिंचाई परियोजना तय समय से दो वर्ष बाद भी अधूरी है। पानी न मिलने से फसलें प्रभावित और किसान परेशान हैं। वन विभाग की अनुमति में देरी मुख्य कारण बताई जा रही है। मार्च में टेस्टिंग शुरू होने का दावा किया गया है।

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योजना के तहत बनी टंकी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आदिवासी बाहुल्य जिले धार की सरदारपुर तहसील के गांवों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शुरू की गई नर्मदा माइक्रो सिंचाई परियोजना अब तक अधूरी हुई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था, ताकि सूखाग्रस्त क्षेत्र के किसानों को स्थायी और पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके, लेकिन तय सीमा से अधिक दो वर्ष बीत जाने के बावजूद किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। पानी की कमी के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसान आर्थिक रूप से परेशान हैं।
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परियोजना में देरी का मुख्य कारण वन विभाग की भूमि से संबंधित अनुमति न मिल पाना बताया जा रहा है। इसी वजह से कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। हालांकि संबंधित अधिकारियों का कहना है कि मार्च माह परियोजना के अंतर्गत टेस्टिंग कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। कार्यदायी एजेंसी को शेष कार्य शीघ्र पूरा करने के सख्त निर्देश भी दिए गए हैं। योजना के तहत ग्राम मिंडा में कमांड क्षेत्र बनाया गया है।

दरअसल सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में 1425 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2019 में शुरू की गई थी। जिससे विकासखंड के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने पर विकासखंड के 66 गांवों की करीब 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ मिलने वाला था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और कार्य में देरी के कारण यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
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विधायक ग्रेवाल ने लिखा पत्र
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अभियंता को पत्र लिखकर परियोजना को जल्द चालू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि तत्काल टेस्टिंग कर किसानों को समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसान सुरेंद्र सिंह मिंडा, धन्नालाल किर और धीरज पाटीदार ने बताया कि परियोजना का कार्य जल्द पूरा होना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि विकासखंड के करीब 30 गांव, जो अभी इस योजना से वंचित हैं, उन्हें भी शामिल किया जाए। किसानों ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है, लेकिन कार्य में लगातार देरी और प्रशासनिक लापरवाही से किसानों की उम्मीदें अब भी अधर में हैं। इनका कहना है कि परियोजना के चीफ इंजीनियर श्यामसुंदर राउत ने बताया कि मार्च में इस परियोजना के तहत टेस्टिंग कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। अलग-अलग चरणों में पानी छोड़ा जाएगा। साथ ही शीघ्र कार्य पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया है।
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