धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में धार की अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए निजी कंपनी में सीनियर अकाउंट मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे राघव पिता श्रीराम राजपूत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर 1 करोड़ 97 लाख 73 हजार 717 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। धोखाधड़ी के मामलों में यह संभवतः पहला प्रकरण है, जिसमें अदालत ने इतनी बड़ी राशि सीधे आरोपी से वसूलने के निर्देश दिए हैं।
यह था मामला
धार जिले में कंपनी की ऑडिट टीम द्वारा जब लेन-देन की जांच की गई तो यह गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) को मामले की जानकारी दी गई। शक्ति इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड के विधिक सलाहकार ने आरोपी राघव राजपूत के खिलाफ थाना पीथमपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
लैपटॉप और मोबाइल जब्त
कंपनी के अनुसार सीनियर अकाउंट मैनेजर होने के कारण राघव राजपूत को कंपनी के सभी वित्तीय लेन-देन का अधिकार दिया गया था। आरोपी ने जून 2021 से मनमाने तरीके से कंपनी के पैसों का उपयोग किया और आपराधिक न्यास भंग करते हुए वेंडरों को भुगतान करने के बजाय बिना अनुमति राशि अपने एसबीआई और एचडीएफसी बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली। इससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान कंपनी का लैपटॉप, आरोपी का मोबाइल फोन और कंपनी व आरोपी के बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए। साथ ही कंपनी में कार्यरत अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए।
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