दतिया शहर के वार्ड क्रमांक 1 स्थित आदिवासी डेरे में शनिवार दोपहर को मंजर बेहद दर्दनाक था। जंगल से उठी आग ने हवा के साथ रफ्तार पकड़ी और देखते ही देखते बस्ती को चपेट में ले लिया। करीब 12 मकान कुछ ही मिनटों में आग की लपटों में घिर गए। लोग संभलते, इससे पहले उनकी वर्षों की गृहस्थी राख हो गई। घरों में रखा राशन, कपड़े, नकदी और जरूरी कागजात सब जलकर खाक हो गए।
रविवार सुबह जब टीम मौके पर पहुंची तो कई घरों से अब भी धुआं उठ रहा था। जले हुए टीन शेड और राख के ढेर के बीच परिवार अपने सामान के अवशेष तलाश रहे थे। बलवंत आदिवासी ने बताया कि दोपहर में जंगल की तरफ से धुआं उठा था। तेज हवा के कारण आग तेजी से बस्ती की ओर बढ़ी। लोगों ने बाल्टी और मटकों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, मगर पानी की कमी ने हाथ बांध दिए। इलाके में बिजली न होने से निजी बोरवेल भी चालू नहीं हो सके।
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आग इतनी तेज थी कि लोग अपना जरूरी सामान भी नहीं निकाल पाए। कई घरों में पिंजरों में पाले गए पक्षी जिंदा जल गए। बच्चों के स्कूल बैग, किताबें और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज भी राख हो गए। पीड़ित परिवार अब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों में सबसे ज्यादा नाराजगी राहत पहुंचने में हुई देरी को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि आग लगने के तुरंत बाद डायल 112 और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई थी। मगर दमकल की गाड़ी रात करीब 10 बजे मौके पर पहुंची। तब तक 12 घर पूरी तरह जल चुके थे। लोगों का कहना है कि समय पर दमकल आ जाती तो नुकसान कम हो सकता था।
घटना के बाद आदिवासी डेरे में मातम पसरा है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। लोगों ने कहा कि उनके पास खाने को अनाज तक नहीं बचा। बच्चों के तन पर कपड़े नहीं हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि शासन सर्वे कराकर जल्द मुआवजा दे और अस्थायी टेंट व भोजन की व्यवस्था करे। मामले की जानकारी मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। एसडीएम ने कहा कि सभी प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आर्थिक सहायता दी जाएगी। बिजली विभाग को भी क्षेत्र में आपूर्ति सुचारू करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पीड़ित परिवार टूटी छतों और बिखरे सामान के बीच मदद की राह देख रहे हैं। एक ही झटके में उनकी पूरी जिंदगी बदल गई।
आग ने उजाड़े आशियाने
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