फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Damoh News: टाइगर रिजर्व में घूमने का आज अंतिम दिन, मंगलवार से तीन महीने तक रहेगा बंद, जानें क्यों

Mon, 30 Jun 2025 08:56 AM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

Damoh: नौरादेही अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। वर्ष 2018 में यहां बाघ-बाघिन का एक जोड़ा छोड़ा गया था, जिसके बाद बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। 23 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रूप में प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व में मौजूद बाघ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन का आज अंतिम दिन है। एक जुलाई से प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व की तरह यहां भी पर्यटकों के प्रवेश पर तीन महीने तक रोक रहेगी। टाइगर रिजर्व अब एक अक्टूबर से दोबारा पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।

विज्ञापन


मध्यप्रदेश का यह सातवां टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। यहां भविष्य में बैटरी चालित वाहन शुरू करने की योजना भी बनाई जा रही है ताकि जंगल में प्रदूषण कम हो और वन्यजीवों को अनुकूल वातावरण मिल सके।

दो अभ्यारण्यों को मिलाकर बना रिजर्व
यह टाइगर रिजर्व नौरादेही और दुर्गावती अभ्यारण्यों को मिलाकर बनाया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल 2,339 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,414 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 925.12 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल हैं।
विज्ञापन


24 से ज्यादा बाघों का कुनबा
वर्तमान में यहां 24 से अधिक बाघ हैं। इनमें नन्हें शावकों से लेकर व्यस्क बाघ भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने अलग-अलग इलाके बना लिए हैं। बाघों के अलावा यहां तेंदुआ, नीलगाय, भालू, सांभर, चीतल समेत कई अन्य शाकाहारी और मांसाहारी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इस टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा दमोह जिले में आता है।

पढ़ें: राजगढ़ में किसानों पर गहराया आर्थिक संकट, 150 बीघा भूमि पर नहीं उगी सोयाबीन; लागत हुई दोगुनी

प्रबंधन की योजनाएं
रिजर्व प्रबंधन इसे अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। सूत्रों के मुताबिक भविष्य में यहां बाघ और चीता दोनों को एक ही रिजर्व में रखने की योजना पर भी विचार चल रहा है। यदि यह संभव होता है तो यह देश का पहला टाइगर रिजर्व होगा जहां दोनों बड़े मांसाहारी वन्यजीव साथ देखे जा सकेंगे।

साथ ही जंगल सफारी के लिए पेट्रोल वाहनों पर रोक लगाकर बैटरी चालित वाहनों का प्रयोग बढ़ाने की तैयारी चल रही है ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। अधिकारियों का मानना है कि पेट्रोल वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण वन्यजीवों के लिए हानिकारक साबित होता है।

पर्यटकों की संख्या में इजाफा
नौरादेही अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। वर्ष 2018 में यहां बाघ-बाघिन का एक जोड़ा छोड़ा गया था, जिसके बाद बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। 23 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रूप में प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। इसके बाद से पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां 1,200 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,600 के पार पहुंच गया।
विज्ञापन


बंद होने का कारण
टाइगर रिजर्व हर साल बारिश के मौसम में बंद कर दिए जाते हैं। इसका एक कारण बाघिनों का प्रजनन काल होता है, जिसके लिए शांत वातावरण जरूरी होता है। दूसरा कारण पर्यटकों की सुरक्षा है, क्योंकि बारिश के दौरान जंगल के रास्ते दलदली हो जाते हैं और नदी-नाले उफान पर रहते हैं। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इसी वजह से एक जुलाई से प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व तीन माह के लिए बंद रहते हैं और एक अक्टूबर से पुनः खोले जाते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें