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Damoh News: रजिस्ट्री में हेरफेर कर स्टाम्प शुल्क चोरी का मामले, पूर्व उप पंजीयक समेत तीन पर सागर में एफआईआर

Wed, 10 Sep 2025 04:04 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह में जमीन की रजिस्ट्री में चतुसीमा बदलकर शासन को 3.19 लाख रुपये के स्टाम्प शुल्क का नुकसान पहुंचाने पर ईओडब्ल्यू सागर ने तीन आरोपियों पर केस दर्ज किया है।
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ईओडब्लू कार्यालय
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विस्तार
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आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) सागर ने दमोह में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान चतुसीमा में हेरफेर कर शासन को स्टाम्प शुल्क का नुकसान पहुंचाने पर तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले में उप-पंजीयक, क्रेता, विक्रेता को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों के इस कृत्य से शासन को 3 लाख 19 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

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दरअसल, दमोह निवासी अजीत अग्रवाल ने इस मामले की ईओडब्ल्यू में शिकायत की थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि तीन आरोपियों ने मिलकर रजिस्ट्री की सीमाओं (चतुसीमा) में हेरफेर कर दिया है और इससे शासन को स्टाम्प शुल्क से वंचित होना पड़ा है। ईओडब्ल्यू ने जांच में पाया कि आरोपियों ने रजिस्ट्री में जानबूझकर भूखंड को मुख्य सड़क से आंतरिक हिस्से में दर्शाया और इस प्रक्रिया में शासन को 3 लाख 19 हजार 739 रुपये का नुकसान पहुंचाया है। शिकायत के मुताबिक यह वाकया साल 2018 से 2020 के बीच का है।

यह है पूरा मामला? 
वर्ष 2018 में दमोह निवासी लखनलाल पटेल ने 0.71 हेक्टेयर भूमि 57 लाख 73 हजार 500 रुपये में खरीदी थी। दो साल बाद वर्ष 2020 में इसी भूमि को उन्होंने 27 लाख 93 हजार 200 रुपये में जगजीत सिंह वाधवा को बेच दिया। इस दौरान तत्कालीन उप-पंजीयक उल्लास नाखरे थे। उनकी भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध है। इसलिए ईओडब्ल्यू ने उन्हें भी आरोपी बनाया है। तीनों ने मिलकर उक्त जमीन की रजिस्ट्री में भूखंड की सीमा को बायपास रोड से जोड़ते दर्शाया, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने भूखंड की दिशा और स्थिति को जानबूझकर बदलकर शासन से स्टाम्प शुल्क में अवैध लाभ लेने की कोशिश की।
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इन धाराओं में केस दर्ज
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने जगजीत सिंह वाधवा, लखनलाल पटेल और तत्कालीन उप-पंजीयक दमोह उल्लास नाखरे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (कूटरचना), 471 (जालसाजी का उपयोग), 120(बी) (आपराधिक षड्यंत्र) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।

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