रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के नोरादेही अभ्यारण से भागी बाघिन कजरी को आखिरकार ट्रेंकुलाइज करने के बाद नोरादेही में छोड़ दिया गया है। पिछले 10 दिन से वनकर्मी इसकी खोज में चिकरघिन्नी बने थे और वह वापस दमोह की ओर बढ़ रही थी। बाघिन कजरी जंगल छोड़ने के बाद से ही अपना स्थान लगातार बदल रही थी। छह अप्रैल को वह झलोन रेंज की सीमा में पहुंची, उसके बाद कभी तेजगढ़ तो कभी झलोन की सीमा में आ जाती थी। टीम ने इसे पकड़ने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। 10 दिन बाद गुरुवार शाम को नोरादेही की टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज करने के बाद नोरादेही अभ्यारण में छोड़ दिया।
गुबरा के समीप मिली बाघिन
कजरी तेजगढ़ वन परिक्षेत्र के जंगल में जिस जगह रुकी हुई थी, वहां बड़ी बड़ी गुफाए हैं। उस स्थान पर पहले तेंदुआ का रहवास था। कुछ महीने पहले यहां एक तेंदुए का शव भी वन अमले को मिला था, जहां बाघिन कजरी रुकी हुई थी। यहां से वह दूसरे स्थान पर चली जाती थी और फिर वापस लौटकर आ जाती थी। वन विभाग की टीम बाघिन की निगरानी में लगी हुई थी। गुरुवार को नोरादेही की टीम समेत डीएफओ अब्दुल अंसारी गुबरा पहुंचे और शाम को बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर नोरादेही ले जाया गया।
अब भालू की दहशत
इधर, जंगल से दो भालू शहरी क्षेत्र तेंदूखेड़ा में आ गए हैं, जिन्होंने इंसानों और मवेशी पर हमला शुरू कर दिया है। गुरुवार सुबह दोनों भालुओं ने लोगों पर हमला किया और लापता हो गए, रात में भालू दिखाई देने पर वन अमले को जानकारी दी गई, लेकिन जब तक टीम मौके पर पहुंची भालू भाग गए।
नगर के लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी शेयर की तो रहवासियों ने देर शाम के बाद घर से निकलना बंद कर दिया है। लेकिन, वर्तमान में यहां विवाह समारोह का आयोजन हो रहा है। इससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। भालू होने की सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग को टीम पूरी रात उनकी तलाश करती रही, लेकिनि कोई सफलता नहीं मिली।
भागचंद उर्फ पप्पू जैन ने बताया की रात में एक भालू भोंडी तिराहे पर उनकी दुकान के पास था। उसने मुख्य मार्ग पर कुछ बाइक सवारों पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह भाग निकले। कुछ समय बाद वह हनुमान मंदिर के पीछे बैठा मिला। जहां से एक खेत में पहुंचा, जिसके बाद लोगों ने उसे खदेड़ दिया। वहीं, दूसरा भालू नगर के वार्ड आठ में देखा गया है।