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देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड: हाईकोर्ट ने सात दोषियों की उम्रकैद रखी बरकरार, 18 आरोपी दोषमुक्त

Thu, 22 Jan 2026 08:55 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह के देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में हाईकोर्ट जबलपुर की डबल बेंच ने सात नामजद आरोपियों की आजीवन कैद की सजा बरकरार रखी, जबकि साक्ष्य के अभाव में 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। सजा बढ़ाने की याचिका भी खारिज हुई।

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दमोह के देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में हाईकोर्ट ने सात की उम्रकैद बरकरार रखने का फैसला दिया है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दमोह जिले के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की डबल बेंच ने सात आरोपियों की अपील खारिज कर दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं रामकुमार चौबे की पीठ ने मामले में आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए एफआईआर में नामजद सात आरोपियों की अपील को खारिज कर दिया, जबकि शेष 18 आरोपियों को दोषमुक्त करने के आदेश पारित किए हैं।
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अधिवक्ता मनीष नगाइच ने बताया कि बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में हाईकोर्ट ने फैसला दिया है। सात आरोपियों चंदू सिंह, गोविंद सिंह, इंद्रपाल, लोकेश, गोलू, श्रीराम शर्मा एवं अमजद बूटा की आजीवन कैद की सजा बरकरार रखी गई है। वहीं संदेह का लाभ देते हुए उन सहआरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, जिन्हें नामजद नहीं किया गया था। 

क्या था मामला
15 मार्च 2019 को हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत पटेरा मार्ग स्थित चौरसिया डामर प्लांट पर कांग्रेस नेता एवं व्यवसायी देवेंद्र चौरसिया की निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर देवेंद्र चौरसिया को गंभीर रूप से घायल कर दिया था, जिनकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।
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25 आरोपियों को माना था दोषी
मामले की सुनवाई के बाद करीब एक वर्ष पूर्व दमोह के अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार कौशिक ने 25 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण करते हुए सात आरोपियों के विरुद्ध सजा को बरकरार रखा, जबकि 18 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न पाए जाने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया। इसके साथ ही फरियादी सोमेश चौरसिया द्वारा सजा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर अपील को भी न्यायालय ने निरस्त कर दिया।

फैसले के बाद हलचल
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हटा और दमोह क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जहां एक ओर दोषमुक्त किए गए आरोपियों के परिजन राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं, मृतक के परिजनों ने फैसले पर असंतोष जताया है। प्रशासनिक स्तर पर भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है।

राजनीतिक और सामाजिक असर
देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड शुरू से ही राजनीतिक रसूख और वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा माना जाता रहा है। हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर इस केस को सुर्खियों में ला दिया है।
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