दमोह जिले के बटियागड़ ब्लाक के हरदुआ जामसा गांव में डायरिया से तीन लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद जिला प्रशासन यहां अलर्ट मोड पर है। यहां पानी दूषित होने का सबसे बड़ा कारण खुले में शौच करना है। पूरे गांव में गंदगी के हालात हैं। जिसके बाद एक कुएं को तार फेंसिंग कर उसके पानी के उपयोग पर रोक लगाई गई है। साथ ही स्वास्थय विभाग, पीएचई और मलेरिया विभाग की टीम गांव में मोजूद है। शनिवार शाम मंत्री लखन पटेल और कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर फिर से गांव पहुंचे और स्वास्थ्य अमले से जानकारी ली।
कलेक्टर कोचर ने कहा कि यहां एक सुलभ शौचालय बनाने का प्लान किया जा रहा है। एक सामुदायिक स्वच्छता केंद्र बनाएंगे, जहां कम से कम 8 टॉयलेट होंगे। एक व्यक्ति को नियुक्त कर सही तरीके से उसका रखरखाव कराया जाएगा। पास के गांव मगरोन में छोटी ट्रालियों के माध्यम से कचरा इकट्ठा करने की व्यवस्था बनाई हुई है। ऐसी व्यवस्था यहां पर भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा। जागरूकता के लिए ग्रामीणों साथ बैठक की है।
कलेक्टर ने कहा कि यहां पर यह बीमारी आई है, इसलिए लोग पानी उबालकर पिएं। गंदे स्रोतों के पानी का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें। जब सुबह यहां पर पानी सप्लाई होता है, उसमें क्लोरीन डालने की व्यवस्था कर रखी है। क्लोरीन डालने के बाद 4 से 6 घंटे तक पानी अच्छा रहता है। यह व्यवस्था हम लगातार करेंगे। स्वास्थ्य विभाग की टीम 24 घंटे रहेगी, दो एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। लोगों से आग्रह है कि खुले में शौच बिल्कुल न करें, अगर ऐसा करना बंद नहीं किया तो यह बीमारियां लगातार आएगी। उन्होंने कहा कि लोग खुले में शौच करते हैं। यह सब गंदा पानी जल के स्रोतों में जाता है।
पीएचई विभाग ने जो नल लगाए हुए हैं, जो पाइप लाइन बिछाई है उसमें भी वही गंदा पानी जाता है और फिर लोग उसका उपयोग करते हैं। इस कारण से लोगों को उल्टी दस्त होते हैं और फिर वे बीमार पड़ते हैं। गंभीर अवस्था में किसी की मृत्यु भी हो जाती है। इसलिए स्वच्छता बनाए रखें। मलेरिया विभाग की टीम भी गांव में लार्वा की जांच करने पहुंची। घर-घर भ्रमण कर बीमार व्यक्तियों की पहचान की गई और उनके ब्लड सेंपल लिए गए। लार्वा सर्वे का कार्य किया गया। बुखार से पीड़ित 15 लोगों की आरडीटी किट से मलेरिया की जांच की गई। इस दौरान 96 घरों में से 29 घरों के 87 कंटेनरों में मच्छरों के लार्वा पाए गए जिन्हें खाली कराया गया। उपयोग के लिए साफ जल का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।